Sonbhadra News : सेवा और समर्पण की प्रतिमूर्ति थी अहिल्याबाई - डॉ0 अनिल मौर्य
पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर के 300वीं जयन्ती स्मृति अभियान के तहत घोरावल विधानसभा के भगवास,औराई में पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उपस्थित रहे बतौर मुख्य.....

गोष्ठी को सम्बोधित करते घोरावल विद्या
sonbhadra
11:38 PM, May 28, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• 300वीं जयंती स्मृति अभियान के तहत घोरावल में आयोजित हुआ पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन
सोनभद्र । पुण्यश्लोक लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होलकर के 300वीं जयन्ती स्मृति अभियान के तहत घोरावल विधानसभा के भगवास,औराई में पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उपस्थित रहे बतौर मुख्य अतिथि काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री सुदामा पटेल, बतौर विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ0 अनिल कुमार मौर्य व अनुसूचित मोर्चा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजीत रावत व घोरावल ब्लाक प्रमुख दीपक पटेल ने पं0 दीनदयाल उपाध्याय, डॉ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी व लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
इस दौरान मुख्य अतिथि काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री सुदामा पटेल ने रानी अहिल्याबाई के संघर्षमयी जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "वे मराठा होल्कर वंश की महान शासिका थीं, जिनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के चोड़ी गांव में हुआ था। उस समय समाज में कन्याओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था, लेकिन उनके पिता मंकोजी राव शिंदे ने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए उन्हें शिक्षित किया। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई शिव भक्ति में लीन, न्यायप्रिय, दृढ़ संकल्प वाली, समाज सेवा को समर्पित एक महान महिला थीं जिन्हें शिवकामिनी महादेवी के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संसद में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल की प्रशंसा करते हुए इसे रानी अहिल्याबाई की विरासत को सम्मानित करने वाला कदम बताया।"
विशिष्ट अतिथि विधायक डॉ0 अनिल कुमार मौर्य ने कहा कि "रानी अहिल्याबाई ने 1767 से 1795 तक अपने शासनकाल में अनेक सामाजिक और धार्मिक कार्य किए। उन्होंने सड़कों, कुओं, विश्रामगृहों का निर्माण कराया और देशभर में मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, जिसमें केदारनाथ से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर तक शामिल हैं। वे केवल एक शासिका नहीं, बल्कि जनकल्याण की प्रतीक थीं, जिन्होंने लोकमंगल को अपने शासन का मूल मंत्र बनाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भी उन्हीं मूल्यों से प्रेरणा लेकर जनहितकारी योजनाएं चला रही हैं।"




