Sonbhadra News: एक दिन के कार्य बहिष्कार के बाद, 7 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
वरासत, नामांतरण, पैमाइश, राजस्व अभिलेखों के अद्यतन, ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों का दायित्व भी लेखपालों पर है।


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Janpad Mirror
घनश्याम पांडे (संवाददाता)
ओबरा (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की ओबरा तहसील इकाई ने लेखपाल संघ की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया गया। इस दौरान तहसील दिवस होने पर एसडीएम को मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर शासन स्तर से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में प्रदेश के लेखपाल 7 अक्टूबर 2026 से चरणबद्ध तरीके से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार करने के लिए विवश होंगे। ज्ञापन में लेखपालों ने कहा है कि राजस्व प्रशासन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद लगातार बढ़ते कार्यभार, संसाधनों की कमी, लंबित पदोन्नति, वेतन विसंगति और अतिरिक्त कार्यों के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वरासत, नामांतरण, पैमाइश, राजस्व अभिलेखों के अद्यतन, ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों का दायित्व भी लेखपालों पर है। संघ की प्रमुख मांगों में लेखपाल संवर्ग का प्रारंभिक वेतनमान लेवल-5 यानी 2800 ग्रेड पे किए जाने और वेतन विसंगति दूर करने की मांग शामिल है। ज्ञापन के अनुसार इस संबंध में पूर्व में भी पत्राचार किया जा चुका है और लेखपालों के कार्य एवं दायित्वों को देखते हुए 2800 ग्रेड पे की संस्तुति का उल्लेख किया गया है, लेकिन शासन स्तर पर निर्णय लंबित है। संघ ने अंतरमंडलीय स्थानांतरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की भी मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि करीब आठ वर्षों से यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से नहीं हुई है। वर्ष 2025 में राजस्व परिषद पोर्टल के माध्यम से 2669 लेखपालों से आवेदन लिए गए थे, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। संघ के अनुसार करीब 2700 लेखपाल वर्तमान में अपने गृह जनपद या गृह मंडल से 400 से 800 किलोमीटर दूर कार्यरत हैं।
इसके अलावा चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करने, विभागीय परीक्षा परिणाम एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र शीघ्र घोषित कर नवनियुक्त लेखपालों के स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में भत्तों में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। संघ ने स्टेशनरी भत्ता ₹100 से बढ़ाकर ₹500 प्रतिमाह, मोटरसाइकिल/वाहन भत्ता ₹1500 प्रतिमाह तथा विशेष भत्ता ₹100 से बढ़ाकर ₹1000 किए जाने की मांग रखी है। लेखपालों को भूलेख कार्यालयों और विभिन्न पटलों से अवमुक्त करने, ग्राम सचिवालयों में कार्य के लिए पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा लेखपाल पद को तकनीकी पद घोषित कर लैपटॉप और मोबाइल जैसे तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। संघ ने कहा है कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर 7 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार किया जाएगा। ज्ञापन में आंदोलन के दौरान प्रशासनिक कार्यों में आने वाली बाधाओं और आमजन को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी शासन एवं राजस्व परिषद पर होने की बात कही गई है।
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