वरिष्ठ नेता एवं अधिवक्ता राघवेंद्र नारायण ने कहा कि अधिवक्ता समाज आम जनमानस के लिए न्याय की अंतिम किरण है। सूबे की सरकार मे जब वही सुरक्षित नहीं रहेगा तो न्याय की लड़ाई कौन लड़ेगा। आम जनमानस का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठ जाएगा। पिछले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के साथ पुलिस दुर्व्यवहार की कई घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 में गाजियाबाद जिला अदालत में जिला जज के साथ विवाद के बाद पुलिस ने अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया, जिसमें कई अधिवक्ता घायल हुए और पूरे प्रदेश में हड़ताल हुई। मार्च 2025 में लखनऊ के विभूति खंड में अधिवक्ताओं और पुलिस के बीच टकराव में पुलिसकर्मियों पर हमले और दुर्व्यवहार के आरोप लगे, जिसके बाद 9 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए। इसी माह संभल जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता जफर अली की गिरफ्तारी पर अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिस ने उन्हें गवाही देने से रोकने का प्रयास किया। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अधिवक्ताओं को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।