इस अवसर पर कार्यक्रम के नोडल अधिकारी/उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 कीर्ति आजाद बिन्द ने किशोरियों को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के विषय में जागरूक करते हुए कहा कि "माहवारी स्वच्छता निहायत जरूरी विषय है। समाज में इस मुद्दे पर खुलकर बात करने की आवश्यकता है। आज भी झिझक के कारण किशोरियां एवं महिलाएं इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहती हैं। सभी विभागों को मिलकर इस पर काम करने की आवश्यकता है। अपर्याप्त माहवारी स्वच्छता महिलाओं एवं बालिकाओं को शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक रूप से हानि पहुँचा सकती है, जहाँ वे संक्रमण, एनीमिया, बांझपन, स्कूल ड्रॉपआउट, हिंसा एवं भेदभाव का शिकार हो सकती हैं। यह केवल व्यक्तिगत स्वच्छता का मामला नहीं है बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता भी है।जिस पर सरकारों, नागरिक समाज और जनसमुदाय को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिये हमें शिक्षा, जागरूकता अभियान, नीतिगत सुधार, अवसंरचना सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है। माहवारी को रूढ़ि-मुक्त करके, सस्ते सैनिटरी उत्पादों को सुनिश्चित करके और व्यापक माहवारी स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करके हम किशोरियों एवं महिलाओं के लिए माहवारी स्वच्छता को बेहतर बना सकते हैं।"