Sonbhadra News : ऐसा तहसील जहाँ 88 लेखपालों के कंधों पर 306 गाँव का बोझ
इन दिनों दुद्धी तहसील का हाल बेहाल है। जहाँ एक तरफ Gen-Z आय-जाति निवास के लिए भटक रहे हैं तो वहीं ग्रामीणों की अपनी समस्या है। लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि एक-एक लेखपाल के पास कई-कई गाँव हैं ।

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1:38 PM, August 21, 2026
- ० Gen-Z और ग्रामीण लगा रहे तहसील के चक्कर
शांतनु कुमार/रमेश यादव
सोनभद्र । इन दिनों दुद्धी तहसील का हाल बेहाल है। जहाँ एक तरफ Gen-Z आय-जाति निवास के लिए भटक रहे हैं तो वहीं ग्रामीणों की अपनी समस्या है। लेकिन इसके पीछे एक बड़ी वजह यह है कि एक-एक लेखपाल के पास कई-कई गाँव हैं । आंकड़ों की बात करें तो दुद्धी तहसील में कुल 306 गाँव हैं जो महज 88 लेखपालों के भरोसे है। ऐसे में आप समझ सकते होंगे कि एक लेखपाल हर रोज अपने गाँव का दौरा भी नहीं कर पाते होंगे, जिसकी वजह से ग्रामीणों को ही लेखपालों की परिक्रमा करनी पड़ती है। आय जाति निवास के अलावा IGRS निस्तारण का भी लेखपालों पर बड़ा दबाव रहता है। इसके अलावा ग्रामीण पैमाइश के लिए कई कई दिन इंतजार करते रह जाते हैं जो आक्रोश का कारण बन जाता है।
स्थानीय लोगों और पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि तहसील में पहले से ही लेखपालों की भारी कमी थी। रही-सही कसर पिछले महीने में एक साथ 11 लेखपालों के स्थानांतरण ने पूरी कर दी। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद क्षेत्र की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। जिले के उच्चाधिकारियों द्वारा स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद दुद्धी तहसील से 8 लेखपालों को कार्यमुक्त (रिलीव) भी कर दिया गया लेकिन उनके स्थान पर लेखपालों की आवाक कम होने के कारण अभी भी तीन लेखपालों को कार्यमुक्त नही किया जा सका हैं।
लेखपालों की इस कमी का सीधा असर आम जनता और खासकर छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। वर्तमान में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों के आवेदन का दौर चल रहा है, जिसके लिए युवाओं को जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों की सख्त जरूरत है। लेखपालों की रिपोर्ट न लगने के कारण सैकड़ों आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर हफ़्तों से लंबित पड़े हैं। इसके अतिरिक्त जमीनी विवादों के निपटारे, भूमि की पैमाइश (पत्थरगड़ी), वरासत दर्ज करने और अंश निर्धारण से जुड़े आवश्यक कार्य भी पूरी तरह ठप हैं।
सबसे ज्यादा फजीहत दूर-दराज के पहाड़ी और जंगली रास्तों से पैसे खर्च करके तहसील मुख्यालय पहुँचने वाले ग्रामीणों को हर दिन मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपने आवश्यक प्रमाण पत्रों और भूमि संबंधी मामलों के लिए दिनों-दिन तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन संबंधित लेखपाल के न मिलने से उनका काम अटका हुआ है।
वहीं तहसील प्रशासन का कहना हैं कि लेखपाल कमी की समस्याओं से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया हैं।ज़ब तक लेखपालों की तैनाती नही होती तब कार्यरत लेखपालों को अतिरिक्त प्रभार देकर कार्य कराया जा रहा हैं।




