Sonbhadra News : कजरी महोत्सव का हुआ भव्य आयोजन, कई जिलों के बड़े कलाकार ने मंच किया साझा
सोन घाटी-सोन माटी के सोन धरा पर भव्य एवं दिव्य कजरी महोत्सव का आयोजन संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश,उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ, राजकीय......so

sonbhadra
2:29 PM, September 18, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• कजरी महोत्सव में कलाकारों का लगा जमावड़ा
सोनभद्र । सोन घाटी-सोन माटी के सोन धरा पर भव्य एवं दिव्य कजरी महोत्सव का आयोजन संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश,उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज चुर्क के प्रांगण में मंगलवार को सम्पन्न हुआ।
मुख्य अतिथि जिलाधिकारी बद्री नाथ सिंह, निदेशक उत्तर प्रदेश लोक कला एवं जनजाति संस्कृति संस्थान अतुल द्विवेदी, इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक एस0 तोमर एवं पं0 आलोक कुमार चतुर्वेदी, डॉ0 अंजलि विक्रम सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कजरी गायन में आश्रया द्विवेदी प्रयागराज व राकेश उपाध्याय गोरखपुर द्वारा प्रस्तुति दी गई। कजरी गायन एवं नृत्य फगुनी देवी मीरजापुर, करमा, डोमकच, झूमर नृत्य नाटिका आशा देवी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसी प्रकार से कजरी गायन एवं नृत्य विन्ध्य कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा तथा नृत्य नाटिका शिवानी मिश्रा वाराणसी द्वारा प्रस्तुति की गई। सभी सम्मानित कलाकारों को जिलाधिकारी सोनभद्र बद्रीनाथ सिंह , निदेशक लोक कला एवं जनजाति संस्कृति संस्थान लखनऊ अतुल द्विवेदी , पंडित आलोक कुमार चतुर्वेदी, धनंजय पाठक, डॉ0 अंजलि विक्रम सिंह, जी0 एस0 तोमर, अजय कुमार सिंह के द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता पर आधारित ऐतिहासिक, पौराणिक,सांस्कृतिक विंध्य पर्वत की श्रृंखलाओं के हृदय तल पर स्थित पवित्र धरा पर भव्य एवं दिव्य,सुसज्जित तरीके से कजरी के महत्व को पहुंचाने का प्रयास सभी के सहयोग से किया गया . कजरी एक ऐसा कार्यक्रम है जो कजरी पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध लोकगीत है। कजरी की उत्पत्ति सोनभद्र व मिर्जापुर से मानी जाती है। सोनभद्र व मिर्जापुर पूर्वी उत्तर प्रदेश में सोन व गंगा के किनारे बसा जिला है। यह वर्षा ऋतु का लोकगीत है। इसे सावन व भादो के महीने में गाया जाता है।
अतुल द्विवेदी ने कहा कि यह अर्ध-शास्त्रीय गायन की जीवंत शैली के रूप में भी विकसित हुआ है और यह गायन केवल बनारस घराने तक ही सिमित होता जा रहा है।कजरी गीतों में वर्षा ऋतु का वर्णन विरह-वर्णन तथा राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन अधिकतर मिलता है। कजरी की प्रकृति क्षुद्र है। इसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है।




