Sonbhadra News : अपनों ने ठुकराया, प्रशासन ने अपनाया, बेघर बुजुर्गों का सहारा बन रहा वृद्धा आश्रम
एक बेटे की चाह में हर मंदिर, मस्जिद, दरगाह, पीर-पैगम्बर की दर पर मत्था टेका, उसकी खुशियों के लिए अपना पूरा-जीवन व सर्वस्व न्यौच्छावर कर दिया, जिसकी उम्मीदों व सपनों की बगियां को अपने पसीने की एक-ए...

गीत-संगीत के बीच मकर संक्रांति का पर्व मनाते वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्ग
sonbhadra
6:52 PM, January 14, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• ढोलक-हरमोनिया की जुगलबंदी के साथ मनाया मकर संक्रांति का पर्व
सोनभद्र । एक बेटे की चाह में हर मंदिर, मस्जिद, दरगाह, पीर-पैगम्बर की दर पर मत्था टेका, उसकी खुशियों के लिए अपना पूरा-जीवन व सर्वस्व न्यौच्छावर कर दिया, जिसकी उम्मीदों व सपनों की बगियां को अपने पसीने की एक-एक बूंद से सींचा आज उम्र की ढलान पर वहीं इस कदर बदल गया अपने ही बेगाने हो गए। यहीं दर्द सोनभद्र के वृद्धा आश्रम में रह रहे हर बुजुर्ग का है। वृद्धा आश्रम में रह-रहे बुजुर्ग एक-दूसरे के दुख-सुख के साथी और हमदर्द है जो आपस में अपना दुख बांटकर बची हुई जिन्दगी में खुशियों के रंग भर रहे है। आज मकर संक्रांति के मौके पर भी सभी वृद्ध अपने साथियों संग खुश नजर आये। पहले सबने एक साथ खिचड़ी का लुफ्त उठाया fir धुप में बैठ कर ढोलक और हरमोनिया की जुगलबंदी का आनन्द उठाया। यहां न तो उनके बीच जाति-पाति की खाई है न मजहब की दीवार। उनके अंदर कुछ है तो वह है अपनों द्वारा दिए गए दर्द का संमदर और वृद्धाश्रम के साथियों का प्यार।
रॉबर्ट्सगंज के छपका स्थित वृद्धाश्रम में परिवार द्वारा त्याग दिए गए है यहॉ उनका कोई वारिश नहीं है। इन आश्रमों में उनके खान-पान, देखभाल, स्वास्थ्य आदि की सुविधा रहती है लेकिन फिर भी उन्हें अपनों की कमी खलती रहती है। यहां रहने वाले बुजुर्ग एक-दूसरे के गम को बांटने का भरसक प्रयास करते है लेकिन अपनों द्वारा दिए गए घाव जेहन में आते ही उनकी आंखों से आंसू बरबस ही छलक आते है।
त्यौहार के मौके पर आती है बच्चों की याद -
वृद्धा आश्रम में निवासरत बुजुर्गों बब्बन सिंह, रामदुलारे प्रजापति, बिहारी, बलिराम, विश्राम प्रजापति, लाल बिहारी, भगवान दास, रविंद्र पटेल, उमादेवी, जयपति, अतवारी केशरी, रजवन्ति, फूलवा आदि ने बताया कि उन्हें अपनों के ठुकराने का मलाल नहीं है पर त्यौहारों पर बच्चे की यादें सताती है। उम्मीद रहती है कि फोन पर बातें होगी, पर कोई नहीं आता। सीने में परिजनों से बिछड़ने के टीस दबाए सब अपनी आखिरी यात्रा का इंतजार कर रहे हैं।
पत्रकार संगठन ने बृद्धा आश्रम में मनाया मकर संक्रांति का पर्व




