Sonbhadra court news : 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दो अभियुक्त दोषी, मुख्य आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने वर्ष 2019 में 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।

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7:32 PM, July 21, 2026
राजेश पाठक (संवाददाता)
सोनभद्र। जनपद के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने वर्ष 2019 में 17 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार को 10 वर्ष के कठोर कारावास सहित कुल ₹50,000 अर्थदंड तथा सह-अभियुक्त सूर्य नारायण को पांच वर्ष के कारावास और ₹10,000 अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार 25 जुलाई 2019 को दिनेश कुमार अपने सहयोगी सूर्य नारायण के साथ मिलकर 17 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि उसने पीड़िता को अपने कब्जे में रखकर उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर पीड़िता की माता ने संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस विवेचना के दौरान पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, न्यायालय में उसका बयान दर्ज कराया गया तथा विद्यालयी अभिलेखों और जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर यह सिद्ध किया गया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। विवेचना पूरी होने के बाद दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसकी माता, चिकित्सक, विवेचक, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका समेत अन्य गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध माना।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ओमकार शुक्ला ने मुख्य अभियुक्त दिनेश कुमार को भारतीय न्याय संहिता के समकक्ष लागू भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराते हुए धारा 363 में पांच वर्ष का कारावास व ₹10,000 अर्थदंड, धारा 366 में सात वर्ष का कारावास व ₹10,000 अर्थदंड तथा धारा 376 में 10 वर्ष के कठोर कारावास व ₹30,000 अर्थदंड की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वहीं सह-अभियुक्त सूर्य नारायण को धारा 363 के तहत दोषसिद्ध करते हुए पांच वर्ष के कारावास एवं ₹10,000 अर्थदंड से दंडित किया गया।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि अभियुक्तों से वसूली गई अर्थदंड की राशि नियमानुसार पीड़िता के चिकित्सीय उपचार, मानसिक पुनर्वास एवं अन्य आवश्यक सहायता के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिनेश प्रसाद अग्रहरी एवं विशेष लोक अभियोजक नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और विधिक तर्कों के आधार पर न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए दंडादेश पारित किया।




