Sunday , September 25 2022

झोलाछाप डाक्टर ने ली गर्भवती महिला की जान, परिजनों ने किया हंगामा

आनंद कुमार चौबे/जयनाथ मौर्या (संवाददाता)

सोनभद्र । चिकित्सा के क्षेत्र का आधा अधूरा ज्ञान जान मरीजों को मुसीबत में डाले हुए है। वहीं कोई कार्रवाई न होने से झोलाछाप डॉक्टर आए दिन लोगों की जान ले रहे हैं। लगातार हो रही घटनाओं से सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन झोलाछापों पर शिकंजा कसने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम क्यों है ?हालांकि विभाग हर बार यही दावा करता है कि झोलाछापों पर कार्रवाई की जा रही है।

ताजा मामला रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के मधुपुर-नौगढ़ रोड पर स्थित एक अस्पताल का है। जहाँ नागनार हरैया निवासी प्रियंका (27वर्ष) पत्नी रिशू मौर्य की इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ने पर वाराणसी ले जाते समय मौत हो गयी। आक्रोशित परिजन शव के साथ वापस मधुपुर-नौगढ़ रोड़ स्थित अस्पताल लौटे और हंगामा करने लगे। हंगामे की सूचना जैसे ही सुकृत चौकी प्रभारी को हुई वह दलबल के साथ मौके पर पहुँच गए। इसी बीच पुलिस के आते ही मौका देखकर कथित चिकित्सक भी रफूचक्कर हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया। परिजनों का आरोप हैं कि झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से मरीज की जान गई हैं।
इधर मामला संदिग्ध होने के वावजूद पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को परिजनों के सुपुर्द करते हुए अंतिम संस्कार भी करा दिया। पुलिस की इस कार्यवाई से जहां ग्रामीणों में रोष व्याप्त हैं वहीं कई सवाल भी खड़े हो गए ।

जानकारी के अनुसार, प्रियंका चार महीने की गर्भवती थी। आज उसको दर्द की शिकायत होने पर परिजनों द्वारा इलाज के लिए मधुपुर-नौगढ़ रोड पर स्थित एक अस्पताल लाया गया था, इस दौरान गलत इलाज के बाद जब उसकी स्थिति बिगड़ने लगी तो डॉक्टर ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। जहाँ रास्ते में ही प्रियंका की मौत हो गयी। मौत की खबर सुनते ही कथित चिकित्सक रफूचक्कर हो गया। जिसके बाद परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया और पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही शव को परिजनों के सुपुर्द करते हुए अंतिम संस्कार भी करा दिया। जहाँ पुलिस की इस कार्यवाही से ग्रामीणों में रोष व्याप्त हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार करते हुए शव को अपने साथ ले गए।

बहरहाल सुकृत पुलिस ने हंगामें को खत्म कर मामला तो शांत करा दिया लेकिन बड़ा सवाल यह है कि महिला का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। जब घटना पूरी तरह से संदिग्ध थी तो पुलिस को शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना चाहिए था।

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