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ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर दायर याचिका पर हिन्दू के पक्ष में आया फैसला

ज्ञानवापी परिसर स्थित मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग को लेकर दायर याचिका को वाराणसी की कोर्ट ने सुनवाई के योग्य माना है । वाराणसी की जिला अदालत ने हिन्दुओं के पक्ष में फैसला दिया है । कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद में श्रृंगार गौरी मंदिर में हर रोज पूजा करने की याचिका को जायज ठहराया है । कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि याचिका सुनने योग्य है । मस्जिद पक्ष की तरफ से दायर याचिका में मेरिट नहीं। मामले में अगली सुनवाई 22 सितम्‍बर को होगी।

गौरतलब है कि संसद में सन 1991 में ‘प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट’ पारित हुआ था । इसमें निर्धारित किया गया कि सन 1947 में जो इबादतगाहें जिस तरह थीं उनको उसी हालत पर कायम रखा जाएगा। साल 2019 में बाबरी मस्जिद मुकदमे के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अब तमाम इबादतगाहें इस कानून के मातहत होंगी और यह कानून दस्तूर हिंद की बुनियाद के मुताबिक है।

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर आए जिला कोर्ट के आदेश पर असदुद्दीन ओवैसी का बयान आया है । उन्होंने वाराणसी कोर्ट के आदेश पर चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह के फैसले से 1991 के वर्शिप एक्ट का मतलब ही खत्म हो जाता है। ओवैसी बोले कि ज्ञानवापी मस्जिद का केस बाबरी मस्जिद के रास्ते पर जाता दिख रहा है और ऐसे तो देश में 80-90 के दशक में वापस चला जाएगा।

AIMIM पार्टी के मुखिया ओवैसी ने यह भी कहा कि जिला कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट में अपील करनी चाहिए।

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