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पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में है विशेष महत्व, पढ़ें क्या है मान्यता

पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। शास्त्रों अनुसार श्राद्ध पक्ष भाद्रमास की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं। मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में पितरों को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूजा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितरों के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिण्ड तथा दान को ही श्राद्ध कहते है। मान्यता अनुसार सूर्य के कन्याराशि में आने पर पितर परलोक से उतर कर अपने पुत्र – पौत्रों के साथ रहिने आते हैं, अतः इसे कनागत भी कहा जाता है।

प्रत्येक मास की अमावस्या को पितरों की शांति के लिये पिंड दान या श्राद्ध कर्म किये जा सकते हैं, परंतु पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का महत्व अधिक माना जाता है।

संगम में पिंडदान, तर्पण के लिए देश-विदेश से लोग आने लगे हैं। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार प्रतिपदा से अधिक लोग पिंडदान करेंगे। संगम समेत गंगा-यमुना के घाटों पर दूर-दराज से आये लोगों ने तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में पितरों की तृप्ति के निमित्त तर्पण किया। रविवार को प्रतिपदा की श्राद्ध की जाएगी।

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