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विंध्यवासिनी के जन्मोत्सव पर मन्दिर तिरंगा के रंग में डूबा

मिर्जापुर । विंध्य पर्वत पर विराजमान मां विंध्यवासिनी के जन्मोत्सव पर मन्दिर पूरी तरह से तिरंगा मय हो गया । मंदिर की सजावट और मां के मनोहरी श्रृंगार की एक झलक पाने के लिए भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली ।

मान्यता है कि श्री कृष्ण की बड़ी बहन महामाया का प्राकट्य कंस के कारागार में भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था। कंस के हाथ से छूटकर वा विंध्य पर्वत पर विराजमान हुई थी । तब से लेकर आज तक योगमाया अपने भक्तों का कल्याण कर रही हैं।

वैसे तो हर साल मां विंध्यवासिनी का जन्मोत्सव मनाया जाता है । लेकिन इस साल का नजारा कुछ अलग ही दिखा। अमृत महोत्सव के अवसर पर पूरा मंदिर परिसर तिरंगा मय दिखा। मां के गर्भ गृह से लेकर पूरा मंदिर परिसर और त्रिकोण क्षेत्र तिरंगा के रंग में डूबा था।

तीर्थ पुरोहित के अनुसार कान्हा की बड़ी बहन के रूप में विंध्य पर्वत पर विराज मान मां विध्यांचल का जन्मोत्सव विंध्य धाम में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता रहा है । श्री कृष्ण से मात्र 6 दिन बड़ी महामाया के दरबार में पहुंचे । भक्त उनका दर्शन पाने की लालसा में लंबी कतारों में लगे हैं । मां का दर्शन पूजन कर शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। भक्तों का मानना है कि मां का दर्शन करने से उन्हें शक्ति प्राप्त होती है और माता सदैव रक्षा करती है । तिथि पर आदिशक्ति मां का जन्मोत्सव हर्ष उल्लास के साथ मनाया जा रहा है । माता के धाम इस वर्ष भी धूमधाम से जयंती समारोह मनाए जाने की तैयारी की गई है । कारागार में उत्पन्न हुई महामाया पापी कंस के हाथ से छूट कर आकाश में विलीन हो गई। माता अष्टभूजा विंध्य पर्वत पर आकर विराजमाम हो गई। मार्कण्डेय पुराण में वर्णित है कि “नंद गोप गृहे जाता यशोदा गर्भ सम्भवा, ततस्तौ नाश यिस्यामी विंध्याचल निवासिनी ” ।

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