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कोयला घोटाले से जुड़ा हर सख्स क्यों मना रहा कि बारिश होती रहे ताकि…

शान्तनु कुमार

सोनभद्र एक बार फिर पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है । पीडब्ल्यूडी व पंचायत विभाग में बड़े घोटाले के बाद अब परिवहन विभाग और कोयला घोटाले ने योगी सरकार की चिंता बढ़ा दी है ।

परिवहन विभाग में जिस तरह से माफिया फर्जी रिलीजिंग आर्डर दिखाकर सैकड़ों गाड़ी छुड़ा ले गए और पुलिस से लेकर प्रशासन को भनक तक नहीं लगी । उसी तरह से शक्तिनगर क्षेत्र में 32 बीघे में कोयले का खेल चल रहा था और पुलिस से लेकर स्थानीय प्रशासन बता रही है कि उन्हें पता ही नहीं चला । यानी शक्तिनगर व बीना चौकी पुलिस को उनके क्षेत्र में क्या हो रहा उन्हें पता ही नहीं । जबकि थाना व चौकी क्षेत्र में कई बड़ी-बड़ी परियोजनाएं लगी हुई है । जिस तरह से वहां पुलिस की गतिविधियां देखने को मिल रही है इससे साफ है कि वहां की पुलिस बिल्कुल निष्क्रिय हो चली है और सिर्फ वाहन चेकिंग व छोटी-मोटी चोरी का खुलासा तक ही सीमित है । चाहे कबाड़ चोरी का खेल हो या फिर डीजल और कोयले का, इन खेलों का कभी भंडाफोड़ होते नहीं देखा गया । शायद यही कारण है कि सोनभद्र में तैनात इंस्पेक्टर व सिपाहियों की दिली तमन्ना होती है कि एक बार अनपरा से लेकर शक्तिनगर के बीच में कहीं भी पोस्ट हो जाएं ।

बड़े पैमाने पर माफिया इन क्षेत्रों में अपना कारोबार चला रहे हैं और पुलिस कह रही है कि उन्हें कुछ पता ही नहीं, यही बात किसी की हजम नहीं हो रहा । क्योंकि बासी प्रधान काफी समय से पत्र लिखकर सक्षम अधिकारियों को बताते रहे हैं कि यहां गड़बड़ी चल रही है लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया । अब जब मामला उजागर हो गया तो हाफ कोई दामन बचाने में जुटा हुआ है ।

कुल मिलाकर पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होने लगी है । ऐसे में 10 मिलियन टन अवैध कोयला भंडारण की जिम्मेदारी भी प्रशासन ने उस पुलिस के मत्थे छोड़ दी जो खुद संदिग्ध है। और फिर अभी हाल ही में परिवहन विभाग में देखा गया कि थाने व चौकी से कैसे माफिया फर्जी रिलीज आर्डर दिखाकर गाड़ियां छुड़ा ले गए और पुलिस को भनक तक नहीं लगी, तो क्या ऐसे में यह माना जाए कि कोयला वहां सुरक्षित रह सकेगा ।

फिलहाल प्रशासन ने ब्लैक डायमंड के मास्टरमाइंड को खोजने के लिए 1 सप्ताह का वक्त मुकर्रर किया है । अब देखना है यदि भंडारण का मालिक खुद नहीं आता है तो क्या योगी सरकार की तेजतर्रार पुलिस उस मास्टरमाइंड को खोज निकालेगी, जो महीनों से इस खेल को अंजाम दे रहा था ।

बहरहाल कल से इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि पुलिस कोयला भंडार एक मिलियन टन दिखा रही है जबकि एडीएम प्रशासन द्वारा दिए गए बयान में 10 मिलियन टन बताया गया । अब जब 9 मिलियन टन का अंतर यही दिख रहा है तो ऐसे में प्रशासन को इस बात की पुनः तस्दीक कर लेनी चाहिए कि कोयले का भंडारण है कितना ? क्योंकि जिस तरह से उसमें आग सुलग रही है और माफिया से लेकर उनके सहयोगी और शुभचिंतक इंद्रदेव से बारिश करवाने की गुहार लगा रहे हैं ताकि डंप किया हुआ पूरा माल सुलह कर राख हो जाए और यह मामला हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाए । ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता हैं कि

अब लोगों को 1 सप्ताह के वक्त का इंतजार है अब देखना यह दिलचस्प होगा कि इसका कोई मालिक सामने आता है या नहीं और फिर यदि आता है तो क्या दलित रखता है।

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