Tuesday , October 4 2022

काला सोने के अवैध भंडारण का कनेक्शन कहीं बिजली संकट से तो नहीं, प्रशासन जांच में जुटी

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

– 10 मिलियन टन कोयले का नहीं मिला भंडारण का कोई मालिक

– लगभग 10 मिलियन टन अवैध कोयला मिलने से प्रशासन भी सकते में

– इस काले खेल की जानकारी कैसे किसी को नहीं हुई

– प्रशासन कोयला को सीज कर शुरू की जांच

– कोयले के मालिकाना हक के लिए एक सप्ताह का समय

देश – प्रदेश बिजली संकट से जूझती रही और सरकारें विपक्ष के निशाने पर चल रही थी लेकिन किसी के पास कोई जबाब नहीं था । इधर कोयला कम्पनी लगातार दावा कर रही थी कि उनका उत्पादन लक्ष्य से ज्यादा चल रहा है। ऐसे में सरकार बिजली कम्पनियों को निर्देशित किया था कि कोयले का स्टॉक बनाकर चले । लेकिन सभी उपाय करने के वावजूद बिजली संकट दूर होने का नाम नहीं ले रहा था । लोग धरना प्रदर्शन पर उतारू हो गए और सरकारें बैकफुट पर थी ।

आज हम आपको उस सच को बताने जा रहे हैं जिस सच के बारे में शायद सरकार को भी नहीं पता कि बिजली संकट पर उसे फेल करने के पीछे कोयला माफियाओं का हाथ हो सकता है । क्योंकि काला सोने के इस खेल को लेकर प्रशासन को आशंका है कि जांच में यह एक एंगल हो सकता है ।

दरअसल पिछले कुछ दिनों से जिला प्रशासन को ऐसी सूचना मिल रही थी कि शक्तिनगर थाना क्षेत्र के कृष्णशिला रेलवे साइट के पास बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण किया गया है, जिसमें से धुआं निकल रहा है जो न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि बड़ा जनहानि होने की संभावना है । इस सूचना के बाद एडीएम प्रशासन सहदेव मिश्रा ने तत्काल बिना देर किए प्रदूषण अधिकारी समेत वन विभाग व तहसील प्रशासन तथा लेखपाल को भेज कर जांचकर रिपोर्ट देने को कहा । जांच टीम जब जांच करने पहुंची तो वहां लगभग 32 बीघे का खाली जमीन था जिसमें बड़े पैमाने पर कोयला भंडार किया हुआ था लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था । रिकार्ड खंगालने पर लेखपाल ने बताया कि यह जमीन एनसीएल के नाम दर्ज है । मामला गंभीर व बड़ा देखकर जांच टीम ने इसकी सूचना तत्काल एडीएम को दी और मौके पर चलने का अनुरोध किया । जिसके बाद एडीएम सहदेव मिश्र खुद मौके पर पहुंचे ।

एडीएम ने जब पूरे मामले को नजदीक से देखा व सुना तो उनके भी होश उड़ गए । उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि जिले में इतना बड़ा खेल चल रहा है और किसी को जानकारी तक नहीं । जिसके बाद उन्होंने तत्काल स्थानीय पुलिस के अलावा एनसीएल प्रशासन व ग्राम प्रधान को मौके पर बुलाया और पूछताछ शुरू की तो एनसीएल ने तो हाथ खड़े करते हुए कहा कि न जमीन उनकी है और न इस कोयला भंडारण के बारे में कोई जानकारी है । लेकिन जब एडीएम ने एनसीएल अधिकारी को बताया कि खतौनी में एनसीएल दर्ज है । लेकिन एनसीएल अधिकारी अपने बयान पर अडिग रहे कि इस जमीन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न कोयला भंडारण की जानकारी थी । जिसके बाद तो एडीएम भी सकते में आ गए कि आखिर लगभग 10 मिलियन टन कोयला पड़ा है और इसका कोई मालिक नहीं । उन्होंने कोयला सीज करते हुए सूचना निकलवा कर एक सप्ताह का समय दिया है कि यदि इस भंडारण के बारे में कोई जानकारी रखता है तो संपर्क करे अन्यथा कोयले की नीलामी कर दी जाएगी ।

बासी प्रधानपति का कहना है कि काले सोने का खेल कई महीनों से चल रहा है । उन्होंने बताया कि लगभग 32 बीघे के इस जमीन पर बड़ी संख्या में पेड़ लगा था लेकिन धीरे-धीरे सब काट दिया गया । जिसके बाद बासी इलाके में प्रदूषण भी बढ़ा है । प्रधानपति ने बताया कि यह रास्ता बच्चों के आने-जाने का था लेकिन काम शुरू होते ही सब बन्द हो गया ।

ऐसे में बड़ा सवाल यह हैं कि जिस तरह से इतने बड़े पैमाने पर यह खेल चल रहा था किसी को जानकारी कैसे नहीं हुई । उस इलाके का हल्का दरोगा व चौकीदार को यह खेल की जानकारी क्यों नहीं हो सकी । यानी पुलिस उस इलाके में सही तरीके से गस्त नहीं करती या फिर यदि जानकारी थी तो उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गयी ।

सवाल तो यह भी उठना लाजमी है कि इतने बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चल रहा था तो एनसीएल को जानकारी कैसे नहीं हुई । और वन विभाग क्या कर रहा था जब पेड़ कट रहे थे, फारेस्टर को जानकारी क्यों नहीं हुई ।

इसके अलावा इस कारोबार में लगे ट्रांसपोर्ट कौन थे जो काला सोना ढोते थे और किसी की भनक तक नहीं लगी ।

यदि पूरे घटना क्रम पर नजर डालें तो रेलवे स्टाफ भी अवैध कारोबार में अहम रोल अदा करता रहा है । क्योंकि जिस तरह से प्रधानपति व स्थानीय सूत्र बता रहे हैं कि यह पूरा खेल मिलावट का है, कोयले में चारकोल की मिलावट होती थी । हालांकि एडीएम ने इस बात की पुष्टि नहीं की लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया ।

प्रशासन इस बात को लेकर भी जांच कर रहा हैं कि पिछले कुछ महीनों से बिजली संकट को लेकर जिस तरह से देश-प्रदेश जूझ रहा है कहीं आसपास पॉवर प्लांट में भेजे जाने वाले कोयले का कनेक्शन यहां से तो नहीं था । क्योंकि जिस तरह से बिजली संकट के समय कोयले की उपलब्धता बताई जा रही थी और पॉवर प्लांटों में कोयला भी उपलब्ध था तो आखिर संकट किस चीज का था । क्या जिस मिक्स कोयले की बात मीडिया लिख रहा है, वह तो नहीं, क्योंकि सूत्रों के मुताबिक बोगी से कोयला उतार कर उसमें चारकोल मिलाया जाता था और उसे सप्लाई के लिए भेजा जाता था ।

बहरहाल मामला उछलने के बाद अब हर कोई खुद को साफ-पाक दिखाने में जुटा हुआ है लेकिन अंदरखाने का खेल जांच के बाद ही साफ हो सकेगा । फिलहाल प्रशासन ने इस पूरे भंडारण के मालिक को तलाश रही है और इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है । कुल मिलाकर यदि इसका कोई मालिक सामने नहीं आता है तो यह न सिर्फ प्रशासन में लिए टेंशन भरा रहेगा बल्कि उत्तर प्रदेश के स्कैंडल में अब तक का सबसे बड़ा स्कैंडल हो सकता है ।

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