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यूपी में भ्रष्टाचार का एक मामला, सोते रहे हाकिम लुट गयी रियासत

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

इन दिनों जहां एक तरफ यूपी में भ्रष्टाचार को लेकर सियासत गर्म है और अधिकारियों की मनमानी के चलते डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक नाराज हैं औऱ राज्यमंत्री दिनेश खटीक को इस्तीफा तक देना पड़ा, ऐसे में परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसके बाद प्रशानिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है । भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला जो शायद उत्तर प्रदेश का पहला हो सकता है । भ्रष्टाचार का यह मामला उजागर होने के बाद यह तो साफ हो गया कि यूपी को अधिकारी ही चला रहे हैं और उसी का नतीजा है कि उनकी मनमानी से न सिर्फ जनता बल्कि जनप्रतिनिधि भी त्रस्त हैं ।

ओवरलोड व सड़क हादसे में हो रहे इजाफे को लेकर सीएम योगी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया था कि किसी भी दशा में ओवरलोड का संचालन न हो बल्कि सीएम ने अधिकारियों को सुझाया था कि ओवरलोड को लोडिंग पॉइंट से रोके ।

इसके बाद जिलाधिकारी सोनभद्र ने खनन विभाग समेत परिवहन व वाणिज्य कर विभाग की संयुक्त टीम बनाकर जांच का आदेश दिया ।
जिसके बाद जांच टीम ने ताबड़तोड़ कार्यवाही की और सैकड़ों ओवरलोड ट्रकों को बंद कर सीज कर दिया ।
प्रशासन की इस कार्यवाही से सड़कों पर फर्राटा भरने वाली ओवरलोड ट्रकें दिखनी तो बन्द हो गयी लेकिन इसके बाद शुरू हो गया एक ऐसा खेल जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी।

दरअसल संयुक्त जांच टीम ने जितनी भी गाड़ियों को बन्द किया था उनमें से सैकड़ों गाड़ियां फर्जी रिलीजिंग आर्डर बनाकर छुड़ा लिया गया । लेकिन उससे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि सभी सीज गाड़ियां पुलिस की कस्टडी में थी लेकिन किसी ने फर्जी रिलीजिंग आर्डर की तस्दीक करने की जहमत नहीं उठाई और फिर एक नहीं सैकड़ों बंद गाड़ियों को माफियाओं ने फिल्मी अंदाज में पुलिस कस्टडी से छुड़ा ले गए ।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि योगी की जिस पुलिस की चर्चा पूरे देश में हैं आखिर उसके कस्टडी से सैकड़ों गाड़ियां फर्जी तरीके से रिलीज करा लिया गया और किसी को कानोकान खबर तक नहीं हुई ।

खनन व परिवहन माफिया बड़ी बारीकी से इस पूरे घटना क्रम को अंजाम देते रहे, उन्हें लगा कि उनकी यह चालाकी कभी पकड़ी नहीं जाएगी। लेकिन जब मीडिया ने इस मामले को उठाया तो प्रशासनिक अमले में भूचाल सा आ गया । आरटीओ मिर्जापुर ने भी आनन-फानन में एक जांच कराई, जिसमें जो तथ्य निकलकर सामने आया उसे देखकर आरटीओ के भी होश उड़ गए।

आरटीओ प्रवर्तन मिर्जापुर ने बताया कि जांच में 19 गाड़ियों की रिपोर्ट सामने आई है जो फर्जी रिलीजिंग आर्डर के आधार पर छोड़ दिया गया । उन्होंने कहा कि जांच कराई जा रही है और इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है ।

बहरहाल खनन में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सीएम योगी ने यह विभाग पास रखा है लेकिन सीएम योगी को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि भ्रष्टाचारी किसी के नहीं हैं, उनका तो एक ही सूत्र है राम-राम जपना पराया माल अपना….

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