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भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा PWD विभाग का यह कर्मचारी, शपथ पत्र देकर विभाग की खोली पोल

शान्तनु कुमार/आंनद चौबे

सीएम योगी भले ही भ्रष्टाचार खत्म कर जीरो टॉलरेंस की सरकार देने की कोशिशों में जुटे हों मगर भ्रष्टाचारी अपने आदतों से बाज नहीं आ रहे । सीएम योगी कई बार अधिकारियों व कर्मचारियों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते नजर आए लेकिन भ्रष्टाचारी अपनी आदतों में कोई सुधार नहीं लाए।

ट्रांसफर सीजन में जिस तरह से स्वास्थ्य विभाग से लेकर बिजली व पीडब्लूडी विभाग में गड़बड़ी हुई उसके लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सहित कई जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए सीएम से जांच कर कार्यवाही के लिए कहा था ।

जिसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने जांच कराई तो पीडब्लूडी विभाग में भ्रष्टाचार की सुई मंत्री के ओएसडी पर जा टिकी । इसके बाद सीएम ने सोमवार को पीडब्लूडी विभाग में बड़ी कार्यवाही करते हुए पीडब्लूडी मंत्री जितिन प्रसाद के ओएसडी को कार्यमुक्त करते हुए वापस मूल विभाग भेज दिया ।

सीएम योगी के इस कार्यवाही से भले ही राजनीतिक गलियारे में हड़कम्प मच गया । मगर यहां सवाल यह उठता हैं कि क्या मंत्री के ओएसडी को हटा देने मात्र से विभाग भ्रष्टाचार मुक्त हो गया, क्योंकि जिस तरह से सोनभद्र में पीडब्लूडी विभाग में तैनात एक कनिष्ठ लिपिक अपने ही विभाग में भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ रहा है और उसे इस जंग में हर दिन नई मुसीबत झेलना पड़ रहा है उससे साफ है कि विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी मजबूत है ।

कनिष्ठ सहायक कुंवर शैलेन्द्र सिंह काफी समय से विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ उच्चाधिकारियों को अवगत कराते रहे हैं । लेकिन शैलेन्द्र सिंह को शायद यह नहीं पता था कि भ्रष्टाचार की जड़े इस कदर मजबूत हैं कि भ्रष्टाचारियों का तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अधिकारी व भ्रष्टाचारी शैलेन्द्र सिंह का ही मानसिक शोषण करने लगे ।
शैलेन्द्र सिंह के मुताबिक जब उन्होंने इसकी लिखित शिकायत की तो अधिकारियों ने शपथ पत्र मांगा । जिसके बाद शैलेन्द्र सिंह ने भी ठान लिया कि वे भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं ।

कुंवर शैलेन्द्र सिंह द्वारा दिये गए शपथ पत्र में 9 बिन्दुओ को दर्शाया गया हैं । लेकिन दफा 5 , 6, व 7 में उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं ।

शैलेन्द्र सिंह ने दफा 5 में आरोप लगाया कि कैसे 2.50 किलोमीटर वैनी सरईगढ़ से चमरान बस्ती संपर्क मार्ग का पैसा तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा द्वारा फर्जी ढंग से निकाल लिया गया ।

जबकि दफा 6 में भी फर्जी ढंग से धन गबन करने का जिक्र है । इसके अलावा दफा 7 में शैलेन्द्र सिंह का आरोप हैं कि ठेकेदार को मैनेज करने के लिए प्रहरी पोर्टल का इश्तेमाल न करके ई-टेंडरिंग पोर्टल पर निविदा आमंत्रित किया गया । जिससे तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा को लाखों का फायदा हुआ।

शैलेन्द्र सिंह ने तो तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा के आय से अधिक संपत्ति की जांच का मामला उठाते हुए जांच की मांग की है।
इस शपथ पत्र से साफ है कि कैसे अधिकारी बड़े पैमाने पर करोड़ों का भ्रष्टाचार किये हैं। शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि शपथ पत्र में दिए गए सभी बिंदुओं का उनके पास साक्ष्य भी मौजूद हैं । उन्होंने सीएम योगी समेत आलाधिकारियों से दोषी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है ।

बहरहाल सीएम योगी ने मंत्री के ओएसडी के खिलाफ कार्यवाही कर यह साफ कर दिया कि यूपी में भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री को शायद यह नहीं पता कि विभाग में ऐसे तमाम भ्रष्टाचारी हैं जो विभाग को दीमक की तरह चाट रहे हैं, जिसकी लड़ाई सोनभद्र का एक कनिष्ठ सहायक लड़ रहा है । अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शैलेन्द्र सिंह द्वारा छेड़े गए इस जंग में सरकार का कितना साथ मिल पाता है क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें न सिर्फ गहरी हैं बल्कि लम्बी भी है, और इस चेन में कौन किसके साथ है यह कहना मुश्किल है ।

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