Friday , September 30 2022

मना ईद-उल-अजहा का पर्व, ईदगाहो में अदा हुई नमाज़

मुमताज़ खान (सवांददाता)

० त्याग और बलिदान का त्यौहार ईद उल अज़हा क्षेत्र में मुस्लिम बन्धुओ द्वारा शांति औऱ सौहार्द से मनाया गया

० ईद-उल-अजहा की नमाज़ मस्जिदों व ईदगाहों में अकीदत के साथ अदा की गई

सुकृत । ईद-उल-अजहा की नमाज आज मस्जिदों व ईदगाहों में अकीदत के साथ संपन्न हुई। इस मौके पर लोगों ने अमन चैन की दुआ मांगी। इसके साथ ही कुर्बानी दी गई। लोगों ने एक दूसरे के गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी। सुबह होने के साथ ही नमाज को लेकर विभिन्न मस्जिदों व ईदगाहों में बुजुर्गों, युवकों के साथ ही बच्चों का जमावड़ा होने लगा । क्षत्रे के तकिया दरगाह, सुकृत ईदगाह मधुपुर मस्ज़िद हिनौता ईदगाह बहुआरा आदि जगहों पर ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई। प्रशासन द्वारा बकरीद को ले मस्जिदों व ईदगाहों के आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह अधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई थी।

विभिन्न मस्जिदों व ईदगाहों में लोगों ने सामूहिक नमाज अदा कर देश व परिवार के खुशहाली की दुआ मांगी। मौके पर ईदगाहों व मस्जिदों के पास मेला सा दृश्य रहा। तकिया मदरसा प्रधानाचार्य मौलाना महफूज़ निज़ामी ने कहा कि “हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन हजरत इब्राहिम अल्लाह के हुक्म पर अल्लाह के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए अपने बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बान करने पर राजी हुए थे। इस पर्व का मुख्य लक्ष्य लोगों में जनसेवा और अल्लाह की सेवा के भाव को जगाना है। ईद-उल-अजहा का यह पर्व इस्लाम के पांचवें सिद्धांत हज की भी पूर्ति करता है।””
बकरीद के मौके पर सभी लोग साफ-पाक होकर नए कपड़े नमाज पढ़े। पुरुष मस्जिद व में तथा महिलाएं घर में नमाज पढ़ी। बाद नमाज़ एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद दिया। इसके बाद ही कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू की गई। साथ साथ सेवई सहित कई लज़ीज व्यजन की दवात भी की गई ।

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