Tuesday , October 4 2022

जिस जनपद की मॉनिटरिंग खुद पीएम करते हों, वहां के बच्चे नहीं जानते प्रधानमंत्री का नाम

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

– एबीएसए की जांच में खुली पोल

– कम्पोजिट विद्यालय बीजपुर के मामला

– सभी टीचरों को मिला कारण बताओ नोटिस

फाइल फोटो

सरकार शिक्षा पर एक बड़ा बजट खर्च करती है लेकिन उस खर्च का परिणाम यह हैं कि शिक्षा के अधिकारी जब बच्चों का ज्ञान टेस्ट किया तो हक्का – बक्का रह गए । बच्चों को देश के प्रधानमंत्री तक का नाम नहीं मालूम । यह मामला नीति आयोग वाले जनपद सोनभद्र का है ।जिसकी मॉनिटरिंग खुद प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री करते हैं । दरअसल कम्पोजिट विद्यालय बीजपुर में म्योरपुर के एबीएसए विश्वजीत कुमार औचक निरीक्षण में पहुँचे थे । निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों से देश के प्रधानमंत्री का नाम पूछ लिया, फिर क्या पूरे विद्यालय में जैसे सन्नाटा छा गया । इसके बाद एबीएसए म्योरपुर ने सभी टीचरों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा कि आप लोगों द्वारा न पढ़ाये जाने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है । एबीएसए ने माना कि यह घोर लापरवाही है । जिसके लिए उन्होंने तीन दिन के भीतर सभी से जबाब तलब किया है ।

एबीएसए विश्वजीत कुमार के पत्र ने यह तो साफ कर दिया है कि कायाकल्प तो सिर्फ बिल्डिंगों का हो रहा है, बच्चे तो सिर्फ मोहरे बन रहे हैं, कभी राजनीतिक दलों के लिए तो कभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ।

बहरहाल यह चर्चा कोई नई नहीं है, यही कमी जब मीडिया दिखाती है तो उसे सरकार विरोधी कहा जाता है लेकिन अब जब शिक्षा विभाग के अधिकारी ने ही खुद शिक्षा व्यवस्था और सवाल खड़ा किया है तो चर्चा होना लाजमी है ।

लेकिन सरकार इसे तब तक नहीं सुधार सकती जब तक कि हर टीचरों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी । सवाल तो यह भी खड़ा होता है कि जब बच्चे के फेल-पास का कोई मतलब नहीं है तो एमए-बीएड और टेट टीचरों की जरूरत ही क्या है ? शायद व्यवस्था का ही दोष हैं कि खुद को योग्य बताने वाले टीचर अपने बच्चों को अपने साथ रखने में हिचकिचाते है ।

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