Friday , September 30 2022

यदि घरों से निकले वाली प्लास्टिक की जिम्मेदारी ग्रामीणों की तो शराब दुकानों से निकलने वाले पाउच की जिम्मेदारी किसकी ..?

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

– लगता है ‘मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी’ अभियान से नहीं जुड़ सका आबकारी विभाग

सोनभद्र । देश में सिंगल यूज प्लास्टिक को बंद किए जाने को लेकर अभियान चला जा रहा है । जिले में भी जिलाधिकारी ने इस अभियान की शुरुआत ड्रीम प्रोजेक्ट के तौर पर की और स्लोगन दिया ‘मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी’ । मगर जिले में सिंगल यूज प्लास्टिक अभियान को लगातार आबकारी विभाग बट्टा लगा रहा है । आबकारी विभाग में भी प्लास्टिक पाउच में शराब आती है लेकिन विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं समझ रहा । लगता है आबकारी विभाग को अपने धंधे के अलावा इस अभियान से कोई लेना देना नहीं है । दरअसल जिले में आबकारी विभाग द्वारा देशी शराब की दुकानों का आवंटन किया गया है, जो ग्रामीण इलाकों से लेकर नगरीय इलाकों में भी स्थापित है। यूँ तो शराब दुकान के बाहर बैठकर शराब पीना मना है लेकिन किसी भी देसी शराब की दुकान के बाहर फेंके गए प्लास्टिक पाउच व बोतल इस बात का प्रमाण है कि पीने वाले बेरोकटोक दुकान के बाहर पीते हैं। इससे न सिर्फ मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान को बट्टा लग रहा बल्कि उन्हें कानून का भी कोई डर भय नहीं। इस व्यवस्था को लेकर यही कहा जा सकता है कि आबकारी विभाग सिंगल यूज प्लास्टिक अभियान के खिलाफ चल रहे मुहिम में दिलचस्पी नहीं ले रहा ।

अब आप खुद सोच सकते हैं कि जिले में प्रतिदिन कितने बड़े पैमाने पर शराब पाउच फेंके जाते होंगे । जहां एक तरफ प्रशासन लोगों को अपने घरों के बाहर बोर्ड टांगने और उसमें घरों के प्लास्टिक डालने की अपील कर रहा है वही आपकारी विभाग अब तक दुकानदारों को इस अभियान से जोड़ नहीं सका । इससे साफ है कि जब आबकारी विभाग अब तक खुद जागरूक नहीं हो सका तो दूसरों को क्या जागरूक करेगा ।

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