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चोपन में न्यायिक प्रक्रिया से अभिलेख दुरुस्त कराये रेलवे – एडीएम

घनश्याम पांडेय (संवाददाता)

चोपन । नगर परिक्षेत्र में रेलवे बनाम स्थानीय निवासियों के भूमि स्वामित्व सम्बंधित विवाद को चोपन व्यापार मंडल की शिकायत पर जिला प्रशासन ने गम्भीरता से लेते हुए इसके न्यायोचित समाधान की पहल की है।

गौरतलब है कि स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा चुके इस मामले के संदर्भ में राज्य सभा सांसद रामसकल के नेतृत्व में चोपन उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष संजय जैन, भाजपा जिला महामंत्री राम सुंदर निषाद एवं अधिवक्ता अमित कुमार सिंह आदि ने जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें जनहित में एक पत्रक सौंपा था। पत्रक के माध्यम से बताया गया था कि रेलवे प्रशासन चोपन प्रीतमनगर क्षेत्र की अधिकांश आबादी को रेलभूमि पर अतिक्रमणकारी मानते हुए बेदखली हेतु अवैध तरीके से नोटिस दर नोटिस जारी कर भयादोहन कर रहा है जबकि रेलवे के अपने कागजात दुरुस्त नही है। रेलवे तमाम लोगों की बैनामा रजिस्ट्री शुदा जमीनों को रेल भूमि बता रहा है। रेलवे की इस एकतरफा कार्यवाही से नगर में जन आक्रोश है और शांति भंग का खतरा बना हुआ है। बताते हैं कि जिलाधिकारी महोदय ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए न्यायोचित कार्रवाई का विश्वास दिलाया है, जिससे लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है।

अब इस प्रकरण पर गंभीर हुए जिलाधिकारी के निर्देश के बाद प्रशासन की पहल पर अपर जिला अधिकारी सहदेव कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में बीते दिनों रेलवे के अधिकारियों के साथ व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों की एक बैठक आयोजित की गई। इसमें रेल अधिकारियों एवं व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने अपना अपना पक्ष रखा

बैठक में पूर्व मध्य रेलवे चोपन के सहायक मंडल अभियंता ओंकार आशीष एवं सेक्शन अभियंता चोपन रतन शंकर उपस्थित थे। रेलवे का पक्ष रखते हुए रेल अधिकारियों ने रेलवे द्वारा वर्ष 1959 से 1964 तक चोपन में स्थित अधिग्रहित भूमि का नक्शा एवं गजट नोटिफिकेशन दिखाया। रेल अधिकारियों ने स्वीकार किया कि रेलवे द्वारा अभी तक अधिग्रहित भूमि पर नामांतरण की कार्यवाही पूर्ण रूप से प्रतिपादित नहीं हो पाई है और 1964 के बाद चोपन दो बार सर्वे प्रक्रिया को पूर्ण कर चुका है। जिस दौरान स्थानीय लोगों द्वारा सर्वे प्रक्रिया में रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि पर अपना स्वामित्व /खतौनी आदि बनवा ली गई है और कुछ लोग बगैर खतौनी के ही रेलवे की भूमि पर घर मकान आदि बनवा चुके हैं।

बैठक में जनहित में रहवासियों का पक्ष रखते हुए व्यापार मंडल प्रतिनिधियों ने कहा कि चोपन प्रीत नगर के स्थानीय निवासियों के नाम सर्वे प्रक्रिया के दौरान जो अभिलेख/खतौनी उनके नाम हुए हैं वह सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में गठित सर्वे एजेंसी,सहायक अभिलेख अधिकारी, अभिलेख अधिकारी, सहायक जिला जज के विभिन्न न्यायालयों में विधिवत रेलवे को प्रतिवादी/अपीलकर्ता बनाते हुए गुण दोष के आधार पर निर्णित किए जा चुके हैं । 40 वर्षों से घर मकान बनाकर रह रहे लोगों को अब रेल अधिकारियों द्वारा बिना पत्रांक एवं अराजी नम्बरों का उल्लेख किए बिना नोटिस बांटकर परेशान किया जाना कदाचित उचित नहीं है।

बैठक में अपर जिलाधिकारी सहदेव कुमार मिश्र ने रेल अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दो बार पूर्ण हो चुकी सर्वे प्रक्रिया के दौरान जो पुराने नंबर से नया नंबर बना ऐसे आराजी नंबर जिस पर चोपन में न्यायिक प्रक्रिया से अभिलेख दुरुस्त कराये।

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