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गांवों में सफाईकर्मी लगा सकते हैं ‘मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान’ को पलीता

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

० जिलाधिकारी की ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर खत्म होगा सफाईकर्मियों का अटैचमेंट ?

० कई सफाईकर्मी ऑफिसों में तो कई घरों में कर रहे काम

० कई सफाईकर्मियों ने अपनी जगह दे रखा है दूसरों को काम

फाइल फोटो

मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान लगातार जोर पकड़ता नजर आ रहा है । प्लास्टिक की वजह से हो रहे नुकसान को देखते हुए जिलाधिकारी सोनभद्र ने इस अनोखे अभियान की शुरुआत की है । इस अभियान की शुरुआत अभी ग्रामीण अंचलों से की गई है फिर नगरीय क्षेत्रों में भी इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा । यूँ तो प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में सभी को पता है किंतु कैसे इससे बचा जाय यह नहीं पता था । प्रशासन लोगों को जागरूक कर लोगों का व्यवहार परिवर्तन कर रहा है और उसकी सही उयोगिता बता रहा है।

प्रशासन ने बताया कि मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान में गांव में हर ग्रामीण को घर के बाहर एक बोरा टांगना होगा, जिसमें वह हर दिन घर में आने वाले प्लास्टिक को डालेगा । जिसे बाद में सफाई कर्मियों द्वारा उठाकर पंचायत भवन पर लगे झाल में इक्कठा किया जाएगा । जहां से यह प्लास्टिक अल्ट्राटेक कम्पनी भेजा जाएगा ।

प्रशासन की इस पहल का लोगों ने सराहना की है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि घर-घर से ग्रामीण प्लास्टिक तो निकाल देंगे लेकिन पंचायत भवन तक ले जाने के लिए सफाईकर्मियों का मिलना कठिन है । क्योंकि जब गांव में सफाईकर्मी सफाई नहीं करते हैं तो घर-घर प्लास्टिक कहाँ से उठाएंगे । ग्रामीणों का मानना हैं कि जिलाधिकारी के ड्रीम प्रोजेक्ट होने के कारण भले ही कुछ दिनों तक सफाई कर्मी दिखावे की नौकरी कर लें । और इसके लिए अधिकारी खुद जिम्मेदार है। क्योंकि बड़ी संख्या में सफाईकर्मी कहीं न कहीं अटैच हैं । सूत्रों की माने तो कई सफाई कर्मी कई ऑफिसों में फाइल ढो रहे हैं तो कई साहेब के घरों में फालोवर का काम कर रहे हैं ।

ऐसा नहीं कि गांवों में सफाईकर्मी न पहुंचने की शिकायत अधिकारियों को नहीं मिलती लेकिन वे कार्यवाही करें तो कैसे करें, जब सफाईकर्मी खुद उनकी सेवा में लगे हैं । विकास भवन से लेकर ब्लाक तक और एडीओ पंचायतों के घरों में सफाईकर्मी अपनी सेवा देते नजर आ जाएंगे । अब ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इतने व्यापक पैमाने पर चलाये जा रहे मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान को यदि सफल बनाना है तो सफाईकर्मियों का अटैचमेंट खत्म करना होगा, ठीक उसी प्रकार जैसे स्कूलों में टीचरों का अटैचमेंट जिलाधिकारी ने खत्म किया है ।

बहरहाल जिलाधिकारी की ड्रीम प्रोजेक्ट मेरा प्लास्टिक मेरी जिम्मेदारी अभियान निश्चित तौर पर काफी उपयोगी है। लेकिन इस पूरे अभियान में सफाईकर्मियों की भूमिका भी काफी अहम है, ऐसे में यदि इस अभियान को सफल बनाना है तो अधिकारियों को न सिर्फ अपना स्वार्थ छोड़ना होगा बल्कि अटैचमेंट के खेल को तत्काल खत्म करना होगा ।

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