Friday , September 30 2022

जब सीएम खुद कर रहे हैं भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही, तो पंचायत विभाग क्यों बचाने में लगा है भ्रष्टाचारियों को

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

० आखिर कब पूरी होगी धूमा व छोढ़ा के शौचालय घोटाले की जाँच

० तारीख पर तारीख देकर किसे फायदा पहुंचा रहा पंचायत विभाग

० शौचालय घोटाला, बेंच घोटाला, सफाई किट घोटाला, रिबोर के नाम पर घोटाला के बाद भी पंचायत विभाग खुद को साफ-पाक बताने में जुटा

सोनभद्र । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी दूसरी पारी में अवैध अतिक्रमण व भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम चला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देशित किया हुआ हैं कि अतिक्रमणकारी या भ्रष्टाचारी कोई भी हो बिना भेदभाव के उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही किया जाय लेकिन सोनभद्र में अधिकारी न सिर्फ मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं बल्कि भ्रष्टाचारियों का मन भी बढ़ा रहे हैं। सोनभद्र में मनरेगा घोटाले की तरह ही जिले में पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों में बनवाए गए शौचालयों में भी जमकर घोटाला किया गया है। प्रधानों व सचिवों ने मिलकर इस खेल को अंजाम दिया। शिकायत पर शुरू हुई जांच के बाद इस भ्रष्टाचार का खुलासा तो हो रहा है लेकिन कार्यवाही के नाम पर पुनः दूसरी जाँच बैठकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जा रहा है।

ताजा मामला चतरा ब्लाक के छोढ़ा ग्राम पंचायत में शौचालय घोटाले की जांच 6 महीने से चल ही रही है। जबकि तत्कालीन प्रधान व सेक्रेटरी पहली जांच में दोषी करार दिए जा चुके थे लेकिन बावजूद इसके अधिकारी पहली जांच को मानने को तैयार नहीं, लिहाजा उन्होंने दोबारा जांच बिठाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। चर्चा हैं कि छोढ़ा गांव का सेक्रेटरी ऊपर तक अपनी पहुँच रखता है, जिसकी वजह से अधिकारी जांच को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं सूत्रों की माने तो बीडीओ चतरा द्वारा जाँच रिपोर्ट डीपीआरओ कार्यालय भेजी गई थी,जिसे देख डीपीआरओ खुद सन्तुष्ट नहीं हुए और रिपोर्ट में त्रुटि दिखाकर पुनः दो दिनों में सही रिपोर्ट भेजने का निर्देश देकर वापस भेज दिया । यानी इस बार भी जांच अधिकारी तत्कालीन प्रधान व सेक्रेटरी को बचाने में लगे हुए हैं ।

यहीं हाल दुद्धी ब्लाक के धुमा ग्राम पंचायत का है, जहाँ शौचालय निर्माण के नाम पर 29 लाख रुपये का घोटाला सामने आने के बाद विभाग की तरफ से कराई गई विगत दिनों जांच में 31 शौचालय अपूर्ण व 210 शौचालय का निर्माण ही नहीं होना पाया गया था। इसके बाद सचिव व ग्राम प्रधान से घोटाले की आधी-आधी धनराशि सात दिन के भीतर जमा करने के लिए रिकवरी नोटिस जारी की गई है लेकिन ग्राम प्रधान और सचिव ने तय समय सीमा के बाद भी रिकवरी की राशि नहीं जमा की। बल्कि नोटिस जारी होते ही काम को सही दिखाने के लिए ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण कराने लगे। अप्रैल माह में ही ग्रामीणों ने शौचालय घोटाले की शिकायत तहसील दिवस के साथ-साथ उच्चाधिकारियों से भी किया था । वहीं इसकी विभागीय जाँच में भी 29 लाख रुपये से अधिक के बंदरबांट की पुष्टि हुई लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी दोषियों पर कार्यवाही नहीं किये जाने से ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। इसी को लेकर सम्पूर्ण समाधान दिवस में इस बार कमिश्नर के सामने यह मामला उठा, मामला सुनकर कमिश्नर भी नाराज हुए लेकिन जिले के अधिकारियों का शायद अधिकारियों के निर्देश से ज्यादा घोटालेबाजों से खास नाता है, तभी तो अधिकारी भ्रष्टाचारियों को न सिर्फ मौका दे रहे हैं बल्कि उनका मन भी बढ़ा रहे हैं । जबकि जरूरत है ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों के संपत्ति की जांच कर बुल्डोजर जैसी कार्यवाही करने की ।

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