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जुगैल में चल रहा था रामराज, जांच हुई तो सिपाहियों की भूमिका निकली संदिग्ध, लोग पूछे- थानेदार का क्या होगा?

शान्तनु कुमार/घनश्याम पांडेय

फाइल फोटो

सोनभद्र । यूँ तो सूबे में बिगड़ते कानून व्यवस्था की कमान खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने संभाल रखी है और अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए प्रशासन को पूरी छूट भी दे रखी है ।

मगर जनपद सोनभद्र में इन दिनों कानून व्यवस्था बिल्कुल चरमरा सी गयी है । जगह जगह ख़ाकी पर ही सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं ।

गत शनिवार को जुगैल इलाके में देर रात एसडीएम व सीओ की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर बालू का अवैध खनन व परिवहन कर रहे 9 टीपर को धर दबोचा और बाद में उसे थाने भेजकर सीज कर दिया । एसडीएम व सीओ की संयुक्त छापेमारी में इतनी बड़ी कार्यवाही सामने आने के बाद से ही जुगैल थाना पुलिस की भूमिका पर सवाल उठना शुरू हो गया था । कप्तान ने जांच रिपोर्ट के बाद थाने के दो सिपाहियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें लाइन भेज दिया । यानी पुलिस भी मान ली कि उनके सिपाहियों के सम्बंध खनन माफियाओं से थे । ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस इलाके में छापेमारी कर कार्रवाई की गई है वहां अवैध खनन लम्बे समय से चल रहा था, तो क्या यह मान लिया जाय कि अवैध खनन की जानकारी इंस्पेक्टर को नहीं थी या फिर उनकी भूमिका भी संदिग्ध ही है ।

यहां एक सवाल निकल कर यह भी आता है कि यदि इंस्पेक्टर को अवैध खनन होने की जानकारी नहीं थी तो ऐसे इंस्पेक्टर के भरोसे थाना कैसे चलेगा जब उनके सूत्र ही कमजोर हैं । और दूसरा सवाल यह भी खड़ा होता है कि यदि उन्हें सिपाहियों के भूमिका की जानकारी थी तो उन्हें पहले क्यों नहीं रोका गया, क्या इंस्पेक्टर की सहमति थी या फिर उनका सिपाहियों पर कोई बश नहीं चल रहा था ।

बहरहाल सिपाहियों के लाइन हाजिर होने से एक बात तो साफ हो गया कि योगी सरकार कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भले ही तमाम उपाय कर रहे हों मगर यह तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक कि विभाग में शामिल ऐसे लोगों के सम्बंध माफियाओं से होंगे ।
ऐसे में जरूरत है संदिग्ध पुलिस कर्मियों के संपत्तियों की जांच करने की, ताकि यदि अवैध संपत्ति का मामला आए तो उनके खिलाफ भी बुल्डोजर की कार्यवाही की जा सके।

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