Thursday , October 6 2022

असनहर गाव के ब्रम्हबाबा परिसर के समीप चल रहे नौ दिवसीय कथा का हुआ समापन

राजेश कुमार(संवाददाता)

बभनी।असनहर गाव के ब्रम्हबाबा परिसर के समीप चल रहे नौ दिवसीय कथा के अन्तिम दिन कथा वाचक ने सुदामा चरित्र, सहित अन्य प्रसंगो पर विस्तार से चर्चा किया।और गुरूवार को हवन और पुर्णाहुति के बाद विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। असनहर गाव के ब्रम्हबाबा मन्दिर परिसर के समीप चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के अन्तिम दिन कथा वाचक भृगुभूषण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया।सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी से समझा जा सकता है।सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं, इसपर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है।अपना नाम सुदामा बता रहा है।जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे।सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया।उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया।जब भी भक्तों पर विपदा आई है।प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं।कथा के दौरान सुदामा,कृष्ण की सुन्दर झाकी भी प्रस्तुत किया कलाकारों ने कृष्ण भक्ति को लेकर….. नौकर रख ले सांवरे, हमको भी एक बार ,बस इतनी तनख्वाह देना मेरा सुखी रहे परिवार गीत सहित अन्य गीतो से पण्डाल मे जय जयकारे लगने लगे।अंत में भागवत भगवान की आरती की गई और लंगर में प्रसाद वितरण किया गया।गुरूवार को हवन पुजा व पुर्णाहुति के साथ साथ विशाल भण्डारा का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य यजमान इंद्रबहादुर तिवारी व आशा तिवारी, विकास तिवारी व उर्मिला तिवारी, आशीष तिवारी व पूजा तिवारी, कामेश्वर प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद, बालकृष्ण तिवारी,संजय कुमार,सरोज कुमार ,रामनुज पान्डेय ,अमरदेव,सहित सैकड़ो की संख्या मे लोगो ने कथा व भण्डारे का प्रसाद लिया।

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