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पूर्व विधायक रूबी प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, हो सकती है बड़ी कार्यवाही

जनपद न्यूज ब्यूरो

– हाल ही में बीजेपी में हुई थी शामिल

– तत्कालीन फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाने वाले अधिकारी व कर्मचारियों के ऊपर गिर सकती है गाज

– तहसील के कार्य कलापों की खुली पोल

– पूर्व विधायक पर जल्द दर्ज हो सकता है मुकदमा व हो सकती है वसूली की कार्यवाही

– बड़ा सवाल, क्या पार्टी अब भी पार्टी में रखेगी पूर्व विधायक रूबी प्रसाद को

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के विधानसभा दुद्धी (403) सीट से वर्ष 2012 में अनुसुचित जाति का प्रमाण पत्र लगा कर चुनाव जितने वाली रूबी प्रसाद का जाति प्रमाण पत्र जांच के बाद प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने निरस्त कर आवश्यक कार्यवाही का आदेश दिया है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के प्रदेश उपाध्यक्ष रामनरेश पासवान ने बुधवार को बताया कि योगी सरकार में भ्रष्ट एवं फर्जी लोगों का स्थान नहीं है। उन्होंने बताया कि दुद्धी विधानसभा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पर फर्जी जाति प्रमाण-पत्र बनवाकर वर्ष 2012 में विधायक बनी रूबी प्रसाद का अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र प्रमुख सचिव समाज कल्याण हिमांशु कुमार ने निरस्त कर दिया है। पूर्व विधायक दुद्धी रूबी प्रसाद का जाति प्रमाण-पत्र फर्जी होने की शिकायत मेरे द्वारा किया गया था। शिकायत पर सभी तथ्यों की जॉच कराने के बाद प्रमुख सचिव समाज कल्याण हिमांशु कुमार अध्यक्ष राज्य स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ ने 17 मई, 2022 को पूर्व विधायक रूबी प्रसाद पत्नी योगेश्वर प्रसाद निवासी ग्राम-म्योरपुर तहसील दुद्धी के पक्ष में जारी जाति प्रमाण-पत्र संख्या-1798 दिनांक 27.12.2007 एवं प्रमाण-पत्र संख्या-703164004368 दिनांक 21.10.2016 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए आवश्यक कार्यवाही हेतु सम्बन्धितों को निर्देश दिये हैं।

बढ़ सकती है मुश्किलें

जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने के साथ ही पूर्व विधायक रूबी प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती हैं । उनके ऊपर फर्जीवाड़े का मुकदमा दायर होने के साथ अब तक लिए गए लाभ की वसूली भी कर सकती है ।

बीजेपी में हुई थी शमिल

पूर्व विधायक रूबी प्रसाद निर्दल चुनाव जीतने के बाद पहले सपा में शामिल हुई और फिर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का दामन भी थामा था । वर्तमान समय में रूबी प्रसाद भाजपा में हैं । रूबी प्रसाद भाजपा में आकर इस बात को लेकर निश्चिंत थीं कि उनका मामला अब हजन उठेगा । चूंकि याचिकाकर्ता रामनरेश पासवान खुद बीजेपी में हैं । लेकिन लम्बे समय से लड़ाई लड़ रहे रामनरेश पासवान ने पार्टी का मुंह नहीं देखा, पहले दोषी को सजा दिलाने के लिए आगे आये और आखिरकार उनके पक्ष में फैसला आया और उनकी बड़ी जीत हुई ।

राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज

पूर्व विधायक रूबी प्रसाद के खिलाफ इस फैसले से राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया । फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जी ढंग से पांच साल विधायकी करने वाली रूबी प्रसाद शायद पहली विधायक होंगी । ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब चुनाव लड़ते समय प्रत्याशी अपना पूरा बायोडाटा जमा करता है तो उस समय प्रमाण पत्र की जांच सही तरीके से क्यों नहीं की गई ? यदि उसी समय सभी प्रमाण पत्र की जांच कड़ाई से कर दी गई होती तो शायद आज यह नौबत नहीं आई होती ।

क्या दोषियों के खिलाफ होगी कार्यवाही

पूर्व विधायक भी प्रसाद के मामले में माना जा रहा है कि फर्जी ढंग से जाति प्रमाण पत्र बनाने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। क्योंकि यदि फर्जी ढंग से जाति प्रमाण पत्र नहीं बनाया गया होता तो शायद यह मामला इतना आगे न बढ़ता और शायद रूबी प्रसाद चुनाव ही नहीं लड़ पाती ।

ऐसे में सवाल यह भी खड़ा होता है कि तहसील स्तर पर इस तरह के प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं । यदि ऐसा है तो इस तरह के प्रमाण पत्र बनाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाने की जरूरत है । क्योंकि यदि इस तरह के प्रमाण पत्र बनने बंद हो जाएंगे तो ना कोई फर्जी विधायकी की लड़ सकेगा और न फर्जी ढंग से कोई नौकरी कर सकेगा ।

पूर्व विधायक ने मीडिया से बनाई दूरी

रूबी प्रसाद ने मीडिया में कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे पहले लखनऊ जाकर पार्टी में बात करेंगी और फिर प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी बात रखेंगी।

बहरहाल अब देखने वाली बात यह है कि पूर्व विधायक व बीजेपी नेता रूबी प्रसाद के मामले में सरकार क्या रुख अपनाती है ।

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