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ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद में नमाज पढ़ने की दी इजाजत, कहा- शिवलिंग वाले स्थान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाय

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालत में सुनवाई हुई । शीर्ष अदालत ने मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी ।इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि मस्जिद में सर्वे के दौरान जिस जगह पर शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है, उस इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए । वहीं निचली अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर (अधिवक्ता आयुक्त) अजय मिश्रा को हटा दिया ।

सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद का कामकाज देखने वाली कमेटी ऑफ मैनेजमेंट अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद की याचिका पर सुनवाई की । जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्ह की पीठ ने कहा कि मुस्लिम बगैर किसी बाधा के नमाज अदा करना जारी रख सकते हैं।

शीर्ष न्यायालय ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया जो ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े वाद की सुनवाई कर रहे हैं।न्यायालय ने याचिकाकर्ता हिंदू श्रद्धालुओं को नोटिस जारी किये और मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई के लिए 19 मई की तारीख निर्धारित की।

इसी दौरान वाराणसी की अदालत में भी ज्ञानवापी को लेकर सुनवाई चल रही थी। अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में वीडियोग्राफी—सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर (अधिवक्ता आयुक्त) नियुक्त किए गए अजय मिश्रा को पद से हटा दिया । सहायक एडवोकेट कमिश्नर अजय प्रताप सिंह ने बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा को लापरवाही के आरोप में पद से हटा दिया है ।

अधिवक्ता आयुक्त पद से हटाए गए अजय मिश्रा ने अपनी सफाई में कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है और जो भी हुआ, उन्हें उसकी उम्मीद नहीं थी । उन्होंने कहा, “मैंने जिस फोटोग्राफर को रखा, उसने धोखा दिया है । मैंने जिस पर विश्वास किया, उससे मुझे धोखा मिला । इसमें मैं क्या कर सकता हूं।”

इस सवाल पर विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने उन पर असहयोग का आरोप लगाया है, मिश्रा ने कहा, “हो सकता है कि उनको लगा होगा । मेरे हिसाब से मैंने कोई असहयोग नहीं किया।” मिश्रा ने कहा, “आयोग की कार्यवाही विशाल सिंह के ही निर्देशन में हुई । अब विशाल जी का हृदय ही जानेगा और मेरा हृदय जानेगा कि मैंने उनका सहयोग किया है या नहीं।”

ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे के काम के लिए अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह पर आयोग की कार्यवाही में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था ।

विशाल सिंह ने अदालत के सामने कहा, “अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा ने एक निजी कैमरामैन आर. पी. सिंह को वीडियोग्राफी सर्वे के लिए रखा था जो मीडिया में लगातार गलत बयान दे रहे थे । इसीलिए सिंह को कल आयोग की कार्यवाही से अलग रखा गया था।” जब कोई अधिवक्ता एडवोकेट कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया जाता है तब उसकी स्थिति एक लोक सेवक की होती है और उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह कमीशन की कार्यवाही पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी से करेगा जबकि अजय मिश्रा ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन बेहद गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया ।

अदालत ने सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने के लिये दो और दिन का समय दिया है क्योंकि इलाके के नक्शे बनाने में कुछ समय लग रहा है । ऐसे में संभव है कि सर्वे रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की जाए । पहले यह रिपोर्ट 17 मई को ही पेश की जानी थी।

मुस्लिम पक्ष अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा पर पहले से ही पक्षपात का आरोप लगाता रहा है। उसने सात मई को सर्वे के दूसरे ही दिन मिश्रा पर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की अर्जी अदालत में दी थी । हालांकि अदालत ने इसे नामंजूर करते हुए मिश्रा के सहयोग के लिये एक विशेष और एक सहायक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की थी ।

गौरतलब है कि ज्ञानवापी—श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कार्य सोमवार को पूरा किया गया था।सर्वे के अंतिम दिन हिन्दू पक्ष ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में एक शिवलिंग मिला है । मगर मुस्लिम पक्ष ने यह कहते हुए इस दावे को गलत बताया था कि मुगल काल की तमाम मस्जिदों में वजूखाने के ताल में पानी भरने के लिये नीचे एक फौव्वारा लगाया जाता था और जिस पत्थर को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह फौव्वारे का ही एक हिस्सा है ।

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