Monday , September 26 2022

स्वास्थ्य निदेशक के निरीक्षण में 9 डॉक्टर समेत 23 स्वास्थ्यकर्मी मिले गैरहाजिर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

जिला अस्पताल में फैली अव्यवस्था देख भड़के निदेशक स्वास्थ्य

● 9 चिकित्सक समेत 23 स्वास्थ्यकर्मी मिले गैरहाजिर

● सभी गैरहाजिर स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने के साथ दिया कार्यवाही का निर्देश

सोनभद्र । स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही व चिकित्सकों की गैर मौजूदगी से देश के अति पिछले जिले में शामिल आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था दम तोड़ रही है। इसकी बानगी शुक्रवार को लखनऊ से आए स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य निदेशक ए0के0 सिंह के निरीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में खुल गई। निरीक्षण के दौरान उन्हें जिला अस्पताल में कई खामियां देखने को मिलीं। इस दौरान ओपीडी में एक डॉक्टर गैरहाजिर मिले, वहीं मरीजों को निजी अस्पताल रेफर किया जा रहा था और अस्पताल में अव्यवस्था का माहौल था। इमरजेंसी, ओपीडी व जनरल वार्ड आदि का निरीक्षण कर सुधार का निर्देश दिया। मामले में हेल्थ डायरेक्टर ने अनुपस्थित डाक्टरों का वेतन रोकने के साथ ही शासन स्तर पर कार्रवाई की बात कही है।

आज स्वास्थ्य निदेशक ए0के0 सिंह सुबह 8.45 बजे जिला अस्पताल आ धमके। स्वास्थ्य निदेशक के औचक निरीक्षण से जिला अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल परिसर में ही जमीन पर लेटे एक वृद्ध को देखा और उनसे पूछताछ की। मरीज ने अपनी समस्या बताई। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के डाक्टर ने उन्हें एक निजी अस्पताल जाने की सलाह दी थी। मरीज की बात सुनते ही निदेशक नाराज हो गए और मरीज को साथ लेकर कर इमरजेंसी वार्ड पहुंचे और वहां मौजूद डाक्टरों से पूछताछ कर नाराजगी जताई। तत्काल मरीज को भर्ती कर इलाज करने का निर्देश दिया। वहीं निदेशक ने जिला अस्पताल पहुंचते ही अटेंडेंस रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिया। जांच के दौरान नौ डॉक्टर समेत 23 स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से लापता मिले। निदेशक ने सभी का वेतन रोकने और उनसे स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। इस दौरान निदेशक को कई मरीजों ने अवगत कराया कि डॉक्टर समेत कई कर्मी रोजाना लेट आते हैं। डॉक्टर बाहर से दवा व जांच लिखते हैं। निदेशक ने चेतावनी देते हुए कहा कि रोक के बावजूद अगर कोई डॉक्टर बाहर से दवाएं लिखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट दी जाएगी। यहां से निदेशक जनरल वार्ड में पहुंच कर मरीजों से उन्हें मिल रही सुविधाओं और इलाज के बाबत जानकारी ली। भर्ती कई मरीजों ने मेन्यू के अनुसार भोजन और समुचित दवाएं न मिलने की शिकायत की।

जनरल वार्ड के निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य निदेशक ने देखा कि जिला अस्पताल में तैनात कई स्वास्थ्य कर्मी अपने कर्तव्यों को लेकर संजीदा नहीं है। जनरल वार्ड के नर्स रूम में घंटों पहले इंजेक्शन में दवा भर कर रखी गई थी। एक ही ट्रे में तीस से अधिक भरे हुए इंजेक्शन देख स्वास्थ्य निदेशक ने नाराजगी जाहिर करते हुए वहां मौजूद कर्मचारियों को हिदायत दी कि दोबारा ऐसी गलती मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य निदेशक ए0के0 सिंह ने बताया कि “उन्होंने जिला अस्पताल औचक निरीक्षण किया है। इस दौरान ओपीडी के निरीक्षण में पाया कि कुल जांच के दौरान नौ डॉक्टर समेत 23 स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से लापता मिले। निदेशक ने बताया कि अस्पताल में काफी अव्यवस्था है। मरीजों को निजी अस्पताल भेजने का मामला भी सामने आया है। अनुपस्थित डाक्टरों का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है इसके साथ ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

जिला प्रशासन से लेकर चिकित्सा विभाग के अधिकारी निरीक्षण करते हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से गड़बड़ी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। चाहे डॉक्टरों के नदारद रहने का मामला हो या मरीजों को निजी हॉस्पिटल भेजने का मामला हो या डिलीवरी में अवैध वसूली की शिकायतें आम थी, लेकिन अधिकारी आंख बंद कर बैठे रहते है लेकिन आज स्वास्थ्य निदेशक स्वयं भी सारी हकीकत से रूबरू हुए तो भौचक्के रह गए। डॉक्टरों के गायब रहने के साथ ही जिला अस्पताल में फैली दुर्व्यवस्था को लेकर ‘जनपद न्यूज live’ प्रमुखता से खबर दिखाता रहा है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य निदेशक के निरीक्षण के बाद भी जिला अस्पताल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपने क्रिया कलापों में बदलाव लाते हैं या फिर स्थिति वहीं ढाक के तीन पात रहती है।

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