स्कूल देखकर आयोग के सदस्य ने पूछा- क्या हम वाकई हिंदुस्तान में रहते हैं ? देखिये रिपोर्ट

शान्तनु कुमार/आनंद चौबे

न तन पर कपड़े और न पांव में जूते। यह नजारा देख उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ई0 अशोक यादव ने वहां मौजूद लोगों से पूछा कि क्या हम वाकई भारत में हैं। सचमुच यह तस्वीर वहां मौजूद हर किसी को हैरान व परेशान करने वाली थी । इस भीषण गर्मी में बच्चों की यह दशा देख बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य काफी भावुक नजर आए ।
दरअसल सोमवार को यूपी बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य सोनभद्र दौरे पर थे । उन्होंने सबसे पहले सर्किट हाउस के पास स्थित प्राथमिक स्कूल घसिया जा पहुंचे । स्कूल पहुंचकर जब वे बच्चों की दशा देखी तो दंग रह गए, न बच्चे ढंग का कपड़ा पहने थे और न उनके पास किताबें थी। कई बच्चे तो बिना कपड़ों के स्कूल में बैठे नजर आए। इतना ही नहीं भीषण गर्मी के वावजूद ज्यादातर बच्चों के पांवों में जूते तक नहीं थे, वे नंगे पांव स्कूल आने को मजबूर हैं । यह सब देख उन्होंने उपस्थित टीचर को जमकर फटकार लगाई ।

इसके बाद सदस्य की टीम ने मिड डे मील को चेक किया । बच्चों को दिए गए खाने को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा खाना तो कोई जानवर को भी नहीं देता।

अंत में बाल संरक्षण अधिकार आयोग के सदस्य ने बच्चों से स्कूल में होने वाले पढ़ाई को लेकर सवाल किया तो कक्षा 5 के बच्चे 2 का पहाड़ा तक नहीं बता सके । ज्यादार बच्चे सिर झुका कर बैठ गए । इस दशा को लेकर जब टीचर से पूछा गया तो टीचर सिर्फ अपनी समस्या गिनाने में लगी रही ।इस पर उन्होंने टीचर को जमकर फटकार लगाई ।

निरीक्षण के दौरान मौके पर पहुंचे एबीएसए से जब आयोग के सदस्य ने इस दुर्व्यवस्था को लेकर सवाल किया तो वे भी सारा ठीकरा दूसरों पर फोड़ने लगे । जिसके बाद बाल संरक्षण अधिकार आयोग के सदस्य ने एबीएसए को भी जमकर फटकार लगाई और जल्द सुधार लाने को कहा।

निरीक्षण के बाद एबीएसए रावर्ट्सगंज ने भी माना कि स्कूल में कुछ कमियां है जिसे जल्द सुधार कर लिया जाएगा ।

बहरहाल सोनभद्र नीति आयोग में शामिल है वावजूद इसके सोनभद्र में इस तरह की व्यवस्था व तस्वीर न सिर्फ सरकार की छवि को खराब करती है बल्कि जनपद का नाम भी खराब हो रहा है । जरूरत है ऐसे अधिकारियों व टीचरों पर कड़ी कार्यवाही करने की ताकि दोबारा इस तरह की बदरंग तस्वीर बाहर न जा सके ।

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