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कर्मचारी-शिक्षक करें शत प्रतिशत करें मतदान – हरि किशोर तिवारी

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । उ0प्र0 में विधान सभा चुनाव चल रहे है तथा पाँच चरण सम्पन्न भी हो चुके है। आज लखनऊ से हरि किशोर तिवारी प्रदेश अध्यक्ष एवं शिवबरन सिंह यादव महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद मण्डल मुख्यालय पर प्रेस वार्ता की और कहा कि हमारे कर्मचारी, शिक्षक समाज की एक बड़ी समस्या पुरानी पेंशन व्यवस्था पुनः बहाल करने की रही है। यह व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है । जब कर्मचारी, शिक्षक 30-40 वर्ष नौकरी कर लेता है तब बुढ़ापा ठीक से कटे इसलिये उसे एक निश्चित धनराशि प्रतिमाह मिल जाती थी ताकि उसका जीवन यापन हो सके।

इस सम्बन्ध में मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी यह निर्णय दिये गये कि पेंशन कोई भीख नहीं है यह कार्मिक के वेतन को निर्धारित करने से बचा वेतन ही है। इसी सुरक्षा के कारण बच्चे सरकारी नौकरी को पसंद करते थे। अब 2005 के बाद सरकारों ने इस व्यवस्था को बंद करके नई पेंशन व्यवस्था लागू कर दी है। सबसे पहले 2003 में तमिलनाडू एवं राजस्थान 2004 में पंजाब, 2005 में उ0प्र0, पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात, बिहार, 2006 में हरियाण, कर्नाटक, 2008 में अरुणांचल, 2010 मिजोरम, जम्मू-कश्मीर आदि और अंत में 2017 में केरल में भी पुरानी पेंशन समाप्त कर दी गयी है। परन्तु पश्चिम बंगाल में अभी पुरानी पेंशन ही देय है। इस योजना में कार्मिक का 10% धन वेतन से कट जाता है और 10% धन सरकार का अंश होता था उस धन को कारपस फण्ड के रुप में तीन जगह SBI, UTI तथा LIC को दिया जाता था और ये उसे शेयर मार्केट में लगाती थी। उससे जो नुकसान या फायदा होता था वह कर्मचारी को मिलना तय होता था। एलआईसी द्वारा IL & FS में जो धन विगत वर्षों में लगाया वह कम्पनी 7 बार डिफाल्टर घोषित हो चुकी है।

विगत 2005 से 2013 तक जब इसके परिणाम देखे तब ज्ञात हुआ कि न तो इस प्रकार के खाते ही खुल पाये न ही कार्मिक का अंश काटा गया और ना ही सरकारी अंश डाला गया। यह बाते सूचना के अधिकार में तथा विधान सभा सदन में प्रस्तुत महालेखाकार की रिपोर्ट में भी सामने आई। तब 2013 से कर्मचारियों के आन्दोलन शुरू हुये। दिसम्बर 2013 में अखिलेश सरकार के विरूद्ध 11 दिन की बड़ी हड़ताल हुई। फिर 2015 में।उसके बाद 2018 में पुरानी पेंशन के सिर्फ एक ही मुद्दे पर पुरानी पेंशन बहाली मंच के तहत सभी कर्मचारी , शिक्षकों , अधिकारियों ने मिल कर आन्दोलन किया तथ योगी आदित्य नाथ जी तथा तत्कालीन मुख्य सचिव अनूप चन्द्र पाण्डे जी ने एक 7 शीर्ष अधिकारियों की एक समिति जिसमें दो कर्मचारी, शिक्षक नेताओं हरि किशोर तिवारी एवं दिनेश चन्द्र शर्मा को भी रखकर 2 माह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिये, परन्तु कई बैठकों की उठा-पटक के बाद भी निर्णय नहीं दिया गया।

इसी क्रम में 2018 तथा 2022 में लाखों कर्मचारी, शिक्षकों द्वारा लखनऊ के इको गार्डन में विशाल महारैली के आयोजन किया गया, जिसमें सरकार को मुद्दे का अंदाजा तो लगा परन्तु अधिकारी नहीं माने। इस बीच कर्मचारी नेताओं को दिल्ली ले जाया गया और 10 प्रतिशत सरकारी अंश की जगह 14% सरकारी अंश की घोषणा कर दी गयी जबकि कर्मचारी नेता पुरानी पेंशन बहाली पर ही अड़े थे। अंत में कर्मचारी नेताओं विशेषकर हरि किशोर तिवारी अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा अपने सभी संगठन के लोगों के साथ जाकर अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी पार्टी से बात की तथा वित्त के अधिकारियों के साथ कर्मचारी नेताओं की बैठकें करवाई। संतुष्ट होने के बाद और वित्तीय भार व सरकार बनने पर भार की स्थिति का आंकलन करने के बाद पुरानी पेंशन योजना पूर्व की भांति लागू करने की घोषणा कर दी। घोषणा उन्होंने प्रेस कान्फ्रेन्स के रूप में संगठनों के लखनऊ में की।

उक्त प्रेस कांफ्रेंस में हरि किशोर तिवारी सहित शिक्षक, कर्मचारी शीर्ष पदाधिकारी भी रहे । इसके बाद भी सरकार के मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी यह बयान देते रहे कि नई पेंशन स्कीम ज्यादा फायदे देगी। हम कर्मचारी संगठनों का मत है कि अधिक फायदा यदि है तो वह सरकार ले जाकर विकास योजनाओं में लगा ले हमे तो पुरानी पेंशन राशि ही देदें हम स्वीकार कर लेगे। जिस योजना को 17 वर्षों बाद भी सरकारे धरातल पर नहीं ला पाई उस पर विश्वास अब नहीं किया जायेगा । बल तो तब मिला जब उ0प्र0 राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद मतदान कर अपनी राजनैतिक निर्णय की आवाज को बुलंद करें।

उक्त प्रेस वार्ता में अध्यक्ष ग्राम पं0 अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी मनोज कुमार दुबे, अरुण सिंह, शैलेन्द्र कुमार त्रिपाठी, राज्य कर्मचारी परिषद महामंत्री सलाउद्दीन, संतोष सिंह डिप्लोमा इन्जिनियर्स संघ, पंकज कुमार मिश्र, राकेश कुमार महामंत्री, शिक्षक संघ के ददन सिंह, सुनील राम व समस्त कर्मचारी संघ के कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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