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बाल संरक्षण टीम और पुलिस की सक्रियता से ‘बालिका वधू’ बनने से बची नाबालिग

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज । सोनभद्र से राजस्थान तक ह्यूमन ट्रैफिकिंग का नेटवर्क फैला हुआ है। प्रतिवर्ष गरीबी का फायदा उठाकर दलालों के जरिए सोनभद्र की लड़कियां राजस्थान लाई जा रही हैं। इसको लेकर कई मामले भी सामने आ चुके हैं, गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। बावजूद अंकुश के बजाय इसकी जड़ें यहां और गहराती जा रही हैं। दूसरे जगहों के कौन कहे जिला मुख्यालय से भी लड़कियां राजस्थान ले जाए जा रहे हैं। इसके लिए राजस्थान के लोग दलालों से संपर्क करते हैं और दलाल गरीबी का फायदा उठा कर कम उम्र की लड़कियों का उनके साथ सौदा करा देते हैं। इसके बदले लड़कियों के मां बाप को भी रुपये दिए जाते हैं और उनकी बेटियों के सुनहरे जीवन के सपने दिखाए जाते हैं।

ताजा मामला झारखंड सीमा से सटे विंढमगंज थाना क्षेत्र के फुलवार गांव में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जरिए 13 साल की मासूम की दोगुने उम्र वाले व्यक्ति से शादी कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। हैरत में डालने वाली बात यह है कि पिता के न होने और मां के पास छह बच्चों के भरण-पोषण की समस्या का फायदा उठाकर, चाचा ने ही दलालों के जरिए राजस्थान के व्यक्ति से उसका सौदा करा डाला।

बृहस्पतिवार की शाम राजस्थान के लोग शादी करने पहुंच भी गए, लेकिन इसकी सूचना बाल संरक्षण टीम को लग गई और टीम मौके पर पहुंच गई। टीम को देख शादी करने आए लोग फरार हो गए। देर रात तक चली कवायद के बाद बच्ची की मां और अन्य परिवारीजनों से 18 वर्ष उम्र पूरी होने के बाद ही शादी करने का लिखित सहमति पत्र लेने के बाद प्रकरण का पटाक्षेप किया गया। जिला बाल संरक्षण टीम को बृहस्पतिवार की शाम सूचना मिली कि विंढमगंज थाना क्षेत्र के फुलवार गांव में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की की शादी राजस्थान के रहने वाले व्यक्ति के साथ कराई जा रही है। इसको गंभीरता से लेते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी पुनीत टंडन ने जिला बाल संरक्षण इकाई की अधिकारी गायत्री दुबे, परामर्शदाता सुधीर कुमार शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता रोमी पाठक, ओआरडब्ल्यू शेषमणि दुबे की टीम गठित करते हुए निर्देशित किया। मामले की तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके बाद टीम ने थानाध्यक्ष सूर्यभान से संपर्क किया, तो वह भी हेड कांस्टेबल विजय शंकर, महिला कांस्टेबल आराधना यादव के साथ फुलवार पहुंच गए। टीम ने देखा कि शादी की तैयारी चल रही थी। उधर टीम को आया देख राजस्थान से आए लोग भाग गए। जांच में पता चला कि पिता की मृत्यु पांच वर्ष पहले ही हो गई है। इस पर किशोरी की मां और चाचा से बालिका के उम्र के संबंध में साक्ष्य मांगा गया, तो उन्होंने कोई भी साक्ष्य उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी। पूछताछ में मालूम हुआ कि पीड़िता कक्षा आठ तक पूर्व माध्यमिक विद्यालय फुलवार से पढ़ी हुई है। टीम ने तत्काल विद्यालय के प्रधानाध्यापक से संपर्क किया। वहां से जारी प्रमाण पत्र के अनुसार उसकी उम्र 13 वर्ष चार माह पाई गई। वहां मौजूद बालिका की मां चाचा और रिश्तेदारों को बाल विवाह कराना अपराध बताते हुए उनसे लिखित सहमति ली गई कि बालिका की उम्र 18 वर्ष होने के बाद ही उसकी शादी करेंगे। इससे पहले शादी का प्रयास करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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