Tuesday , October 4 2022

आखिरकार प्रशासन को जांच अधिकारी की ही करवानी पड़ी जांच, खुल गयी भ्रष्टाचार की पोल, पढ़ें पूरी खबर

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

धरातल पर काम नदारत, जाँच अधिकारी बोले सब ओके

ग्रामीणों की शिकायत पर जब हुई दुबारा जाँच तो पहले जाँच अधिकारी भी बुरे फँसे

सोनभद्र । अब तक आपने पंचायत विभाग में भ्रष्टाचार के कई मामले देखे व सुने होंगे लेकिन आज जनपद न्यूज़ live आपको जिस भ्रष्टाचार की कहानी बताने जा रहे हैं वह कुछ हट कर है यानी हमें यकीन है कि इस तरह की कहानी शायद आपने ही पहले कभी सुनी होगी।

इस कहानी का खुलासा आरटीआई से हुआ। इसमें भ्रष्टाचार कोई बहुत बड़ा तो नहीं है लेकिन भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार होता है साथ ही इस भ्रष्टाचार की कहानी में ट्विस्ट जरूर है। दरअसल मामला घोरावल विधानसभा के तिनताली ग्राम सभा में हुए सड़क और नाली निर्माण का कार्य का है। जब लोगों को इसकी जानकारी हुई तो ग्रामीणों ने पूरे गांव में उस कार्य की खोज शुरु की लेकिन वह काम धरातल पर कहीं नहीं दिखा। जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता विजय उपाध्याय ने आरटीआई का इश्तेमाल कर काम का पूरा विवरण मांगा। आरटीआई के तहत उन्हें जो सूचना विभाग से मिली वह बेहद चौकाने वाला था। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक गांव में दो कार्य स्वीकृत था लेकिन दोनों कार्य मौके पर न कराकर बिना प्रस्ताव के अन्य किसी को लाभ पहुंचाने के लिए न सिर्फ कार्य करा दिया गया बल्कि बिना आईडी जनरेट किये लगभग ₹244980/- धन भी निकाल लिया गया।

मजे की बात यह है कि इस खुलासे के बाद इसकी जांच रॉबर्ट्सगंज सहायक विकास अधिकारी (पं0) को दी गयी लेकिन यहाँ भी जांच के नाम पर खेला हो गया और जांच अधिकारी ने मामले में क्लीन चिट देते हुए अपनी रिपोर्ट लगा दी।

ग्रामीण को यह जांच कुछ हजम नहीं हो रहा था क्योंकि उन्हें पता था कि जो काम उन्हें पूरे गांव में नहीं दिख रहा है उसकी रिपोर्ट क्लीन कैसे हो सकती है। लिहाजा आरटीआई कार्यकर्ता ने इस पूरे मामले को उठाते हुए दोबारा जांच कराए जाने की मांग उच्च अधिकारियों से की। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने इसकी पुनः जांच उपायुक्त श्रम रोजगार से कराई।

आरटीआई कार्यकर्ता विजय उपाध्याय ने बताया कि
पूर्व में सहायक विकास अधिकारी (पं0) विकास खण्ड रावर्ट्सगंज द्वारा जो जांच की गई थी वह पूरी तरह से गलत था। परंतु ग्राम प्रधान से अनुचित लाभ लेकर इन कार्यो की गलत जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की गई है। स्थलीय सत्यापन में एवं सहायक विकास अधिकारी (पं0) की जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने पर पाया गया कि जांच रिपोर्ट एवं स्थलीय जांच में अत्यधिक भिन्नता है।

वहीं उपायुक्त श्रम रोजगार ने जिलाधिकारी को 26 नवम्बर 2021 को अपनी जाँच आख्या प्रेषित कर दिया।

जांच रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि “सहायक विकास अधिकारी (पं0) विकास खण्ड रावर्ट्सगंज द्वारा उपलब्ध कराई गई जांच आख्या में उल्लेख किया गया है कि उक्त दोनों कार्य मौके पर कराया गया है परंतु स्थलीय जांच के समय उक्त दोनों कार्य मौके पर नहीं कराए गए हैं। मात्र एक कार्य कुतुब के घर से नियामत के घर तक रोड मरम्मत का कार्य कराया गया है। जिसकी न तो प्राक्कलन बनाया गया है, न ही वर्क आईडी जनरेट की गई है। उक्त कार्यो पर हुए भुगतान (₹1877+₹5710.00) ₹24480 की सम्पूर्ण जिम्मेदारी ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव एवं तकनीकी सहायक की है साथ ही सहायक विकास अधिकारी (पं0) विकास खण्ड रॉबर्ट्सगंज द्वारा गलत जांच प्रेषित की गई है, जिसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है।”

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब जांच अधिकारी के ऊपर ही सवाल खड़े होने लगे तो जनता किस पर भरोसा करेगी । लेकिन प्रशासन को भी चाहिए कि जनता का भरोसा जीतने के लिए ऐसे लोगों पर कड़ी कार्यवाही करना चाहिए ताकि कोई भी जांच अधिकारी दोबारा इस तरह की हिमाकत ना कर सके।

previous arrow
next arrow

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com