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सोनभद्र में कैसे अद (एस) के प्लान ने चारों सीट पर बीजेपी नेताओं की बढ़ाई टेंशन, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

फाइल फोटो

शान्तनु कुमार/आनंद कुमार चौबे

सोनभद्र । जिले में शीतलहरी चल रही है लेकिन सियासी पारा बेहद गर्म हो चला है। बीजेपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद जिले की राजनीति भी गरमा गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य के करीबी रहे अनिल मौर्य को लेकर कल से जिले में तमाम अटकलें लगाई जा रही है । हालांकि घोरावल से बीजेपी विधायक अनिल मौर्य के समर्थक लगातार सोशल मीडिया पर उनके बीजेपी में बने रहने की बातें कर रहे हैं।

सोनभद्र की बात करें जिले में अपनादल (एस) कैसे सभी चार सीटों पर बीजेपी नेताओं की सियासी गणित बिगाड़ रखी है यह हम आपको आगे बताने वाले हैं।

2017 में अपनादल (एस) ने दुद्धी से दावेदारी की थी और वहां से जीत भी हासिल की थी । लेकिन सूत्रों की माने तो इस बार अपनादल (एस) दुद्धी से दावेदारी नहीं करना चाहती। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अपनादल (एस) ने इस बार 2022 विधानसभा चुनाव के लिए दो सीट ओबरा और घोरावल से दावेदारी की है।

अब यदि सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर पर यकीन करें तो दुद्धी सीट छोड़ने के बाद विधायक हरिराम चेरो का क्या होगा ? क्या वे किसी दूसरे दल में अपना भाग्य आजमा आएंगे या फिर इस बार उन्हें राजनीति विश्राम करना पड़ेगा।

वही ओबरा विधानसभा की बात करें तो सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक अपनादल (एस) ओबरा सीट से दावेदारी कर रही है और मंत्री संजीव गोंड़ को दुद्धी से लड़ने के लिए कहा गया है। ऐसे में अभी यह तय नहीं है कि मंत्री संजीव गोंड़ ओबरा विधानसभा सीट से लड़ेंगे या नहीं। ऐसे में मंत्री जी को खुद यह नहीं पता कि वे क्या करें और कहां से तैयारी करें। क्योंकि वर्तमान राजनीति के हिसाब से देखा जाय तो बीजेपी अपनादल (एस) को किसी भी कीमत पर नाराज नहीं करना चाहेगी। तो ऐसे में अपनादल यदि ओबरा सीट लेने और अड़ गई तो मिल सकती है और यही चर्चा इन दिनों ओबरा विधानसभा में चल रही है।

अब रावर्ट्सगंज विधानसभा की बात करें तो सदर की सीट बेहद दिलचस्प हो चली है । सूत्रों की माने तो अपनादल (एस) ने यहां से दावेदारी तो नहीं की है लेकिन अभिषेक चौबे के चुनाव लड़ने की चर्चा ने इस बात की हवा को और मजबूत कर दिया कि क्या जिले की भाजपा में चल रही अंतर्कलह का फायदा अपनादल नेता अभिषेक चौबे को मिल सकता है । जैसे जिला पंचायत में बीजेपी को कलह की वजह से सीट गंवानी पड़ी थी।

अब घोरावल विधानसभा की बात करें तो सूत्रों के मुताबिक इस सीट से भी अपनादल (एस) ने अपनी दावेदारी की हुई है। वर्तमान में घोरावल से बीजेपी विधायक अनिल मौर्य हैं।

अब यदि यह सीट अपनादल (एस) के खाते में जाती है तो फिर बीजेपी विधायक अनिल मौर्य का क्या होगा ? बीजेपी विधायक के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोबारा टिकट लेने की होगी । घोरावल विधायक को यह तो पता है कि अपनादल गठबंधन को कम से कम एक सीट जाना तय है और वह सीट यदि घोरावल हुआ तो उन्हें भी राजनीति विश्राम करना पड़ सकता है।

मंगलवार को जिस तरह से सूबे की राजनीति में उठापटक हुआ उसे लेकर घोरावल विधायक अनिल मौर्या की चर्चा होना स्वभाविक है। लेकिन जब तक बीजेपी की तरफ से टिकट को लेकर कोई संदेश नहीं मिल जाता तब तक कोई फैसला नहीं ले पा रहे।यहीं कारण हैं कि घोरावल विधायक मीडिया से दूरी बनाने हुए हैं।

बहरहाल राजनीति में कब क्या होगा यह कहना मुश्किल होता है क्योंकि नेता अपने फायदे के लिए कब कहाँ रहेंगे वे खुद भी नहीं जानते । वजह साफ है क्योंकि नेताओं में एक खूबी यह होती है कि वे सियासी रुख पहले ही भांप लेते हैं ।

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