Tuesday , October 4 2022

सवर्ण आर्मी ने जातिगत आधार पर आरक्षण का किया विरोध

जिला संवाददाता

सोनभद्र |सवर्ण आर्मी जन अभियान हर सवर्ण के घर में हो सवर्ण आर्मी का कैलेण्डर के तहत कुशहरा, खरुआव, मुरिलडिह, कनेटी, केवटा,विशुंधरी,शिव द्वार महुंआव गोसाई समेत आदि गावो में हर सवर्ण के घर। में सवर्ण आर्मी का कैलेण्डर लगाया गया । सवर्ण आर्मी की एक बैठक शिव द्वार मोड़ घोरावल पर की गई। बैठक में जिलाध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे, जिला संरक्षक सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी जिला प्रमुख आई0टी0 सेल सुमित तिवारी, चन्द्र बली पाठक, चंद्रदेव पाठक तथा आदि सदस्य संजय शुक्ल अमित शुक्ला सूरज दुबे प्रियांशु पाठक शिवम पाठक ठाकुर सुमित शिंह उपस्थित रहे। सवर्ण आर्मी के जिला संरक्षक सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि,जिस दिन सरकारें सबकी बात करेंगी समानता के आधार पर शिक्षा, रासन,छात्रवृत्ती,रोजगार, प्रधानमंत्री आवास देना शुरू कर देंगी। उस दिन मै सबके लिए आवाज उठाऊंगा। पर यदि जातिगत आधार पर न्याय को देंगी तब मै भी जाति आधार के न्याय पर लड़ूंगा। यदि जाती के आधार पर क्षत्रीवृत्ती, शिक्षा, रोजगार, प्रधानमंत्री आवास देना जातिवाद नहीं हुआ तो सवर्ण एकता की बात करना कैसे जातिवाद हो गया। जनपद प्रमुख आई0टी0 सेल सुमित तिवारी ने कहा कि जब सरकारें आरक्षित जाती तथा जनजाति को आरक्षण दे रही थी तो मामला आराम से चल रहा था। ऐसे में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एसटीएससी मुकदमा लिखवाए जाने पर पहले जांच फिर गिरफ्तारी होने का फैसला सुनाया और भविष्य में कभी भी बिना जांच के गिरफ्तारी ना हो। पर सरकार ने आनन फानन में अपने वोटो के राजनीत के लिए कहा कि पहले गिरफ्तारी फिर जांच की जाएगी। जब 307,302,376 जैसे संगीन धाराओं में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होती है तो ऐसे में मात्र एसटीएससी एक्ट लगा देने से सवर्ण व पिछड़ी जातियों को बिना जांच के गिरफ़्तार कर लेना उनके मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है। जिलाध्यक्ष सूरज प्रसाद चौबे ने बताया कि ई0डब्लयू0एस0 सवर्णों के साथ एक छलावा है।न तो इसके तहत आयु में शुल्क में तथा न ही छात्रवृत्ती में किसी तरह की सवर्णों को छूट नहीं मिलती। तथा कहा की आरक्षित वर्ग की तरह आरक्षित वर्ग की तरह सवर्णों को आयु सीमा में छूट देने की मांग की जिससे कि उन्हें भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने का 5 साल और मौका मिल सके। तथा यह भी कहा कि राजनीति मण्डी में सवर्ण समाज केवल बेचा ही गया है। जिस कारण से गरीब,लाचार सवर्णों की आवाज आज तक नहीं उठ पाई।राजनीतिक दलों में ज्यादातर काम करने वाले सवर्ण ज्यादा तर वैचारिक नपुंसकता व सवर्ण विनाशक है। आगे कहा गया कि अंतिम सांस गिन रहे, जटायु ने कहा था कि मुझे पता था कि मै रावण से युद्ध जीत तो नहीं पाऊंगा। पर यदि मै नहीं लड़ता तो आने वाली पीढ़िया मुझे नपुंसक कहती, एक नारी का अपहरण होता रहा और तुम देखते रहे। सवर्ण समाज मिटने को है सवर्ण समाज की रक्षा के लिए राम तो नहीं बन सकते पर जटायु तो बनो । तथा जिलाध्यक्ष ने कहा कि आरक्षण जाति आधारित न होकर आर्थिक आधार से होना चाहिए।

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