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मकरा अपडेट : जिलाधिकारी की जांच में 32 लोगों के मौत की पुष्टि, मगर जिम्मेदार कौन यह नहीं

शान्तनु कुमार/आनन्द चौबे

म्योरपुर ब्लाक के मकरा ग्राम पंचायत में मौत का सिलसिला अभी भी बदस्तूर जारी है । बढ़ते मौत को लेकर मीडिया में खबर आने के बाद जिलाधिकारी ने एक जांच करवाई थी । जिसमें माह अगस्त से 21 नवम्बर तक 32 मौत होने की बात कही गयी है । इस जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मकरा ग्राम पंचायत में दूषित पानी की वजह से लोगों की जिंदगी जा रही है । इसके बाद जिलाधिकारी ने जल निगम व निर्माण खण्ड को पत्र लिखकर यह कहा कि उक्त लोगों को शुद्ध पानी कर लिए टैंकर की व्यवस्था की जाय ।

ग्रामीणों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में समय सीमा ज्यादा दर्शाया जा रहा है जबकि कम समय में ही ज्यादा मौत हुआ है ।लेकिन यदि इसी जांच रिपोर्ट को मानकर बात करें तो जब मौत का सिलसिला शुरू हुआ था तब अधिकारियों ने सज्ञान क्यों नहीं लिए । लगातार मौतें होती रही लेकिन न स्वास्थ्य विभाग जागा और न पंचायत । और आखिरकार जब मीडिया ने मौत का सही आंकड़ा दिखाना शुरू किया तो प्रशासनिक अमले में हड़कम्प मच गया । इसके बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर पंचायत विभाग की कुम्भकर्णीय नींद टूटी और कैम्प कर मामले को रफादफा करने में जुटे हुए हैं । लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब यह स्वाभाविक मौत नहीं है तो आखिर दोषी कौन है ? जब जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में मौत का कारण बुखार, खांसी, पीलिया व खून की कमी आया है तो इन बीमारियों के लिए दोषी कौन हुआ ? फिलहाल जिलाधिकारी ने जल निगम को शुद्ध पानी मुहैया कराने की बात कही है लेकिन दोषी कौन है इस पर मौन हैं। और शायद यही कारण है कि सोनभद्र में किसी भी बड़े मामले में कार्यवाही न होने से अधिकारियों व कर्मचारियों का मन बढ़ता जा रहा है।

बहरहाल जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में 32 लोगों की विभिन्न बीमारियों से मौत की पुष्टि कर दी है लेकिन जिन घरों का चिराग बुझ गया है उसे मुवावजे के तौर पर क्या मिलेगा यह अब तक साफ नहीं है । और न ही दोषी कौन है तथा उनके ऊपर कार्यवाही होगी कि नहीं यह भी अब तक साफ नहीं ।

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