Wednesday , September 28 2022

लापरवाही: स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मौत बाँट रहे अवैध हॉस्पिटल

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

न डिग्री, न पंजीकरण, धड़ल्ले से चल रहे अस्पताल

रविवार को दुद्धी स्थित एक निजी हॉस्पिटल में प्रसूता की हो चुकी है मौत

● ठंडे बस्ते में गया फर्जी अस्पताल के खिलाफ शुरू हुआ अभियान

ऐसे अस्पतालों पर कार्यवाही के लिए सीएमओ ने बकायदा गठित की है टीम

अवैध हॉस्पिटलों पर कार्यवाही के लिए गठित टीम के नोडल समेत सदस्यों पर अवैध वसूली में लिप्त रहने के लगते रहे हैं आरोप

● शिकायतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी ऐसे दागियों पर नहीं करते कोई कार्यवाही

एक ही एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर हुआ है कई हॉस्पिटलों का रजिस्ट्रेशन- सूत्र

सोनभद्र । प्रदेश सरकार मरीजों को सुविधा देने के लिए जहां सख्ती कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से अस्पताल चल रहे हैं। यहीं वजह है कि जिले में फर्जी अस्पतालों का अवैध धंधा फलफूल रहा है। कुछ का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं और सभी जगह ओपीडी के साथ धड़ल्ले से प्रसव भी कराए जाते हैं। इन अस्पताल के बोर्डों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं। अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए करीब तीन माह पूर्व तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर सदर उपजिलाधिकारी के नेतृत्व में टीम छापेमारी की कार्यवाही कर रही थी लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी के तबादले के बाद अभियान एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि ऐसे हॉस्पिटलों पर कार्यवाही के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी ने बाकायदा नोडल अधिकारी के नेतृत्व में टीम गठित कर रखा है। लेकिन नोडल अधिकारी सहित टीम में शामिल संविदा कम्प्यूटर ऑपरेटर पर पर अवैध वसूली में लिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं।

किराए पर डिग्री दे रहे डॉक्टर

एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्पताल का पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में विश्वस्त सूत्रों के अनुसार कुछ एमबीबीएस डॉक्टर अपनी डिग्री किराए पर देकर मौत का अस्पताल खुलवाने में मदद कर रहे हैं जबकि ऐसे अस्पतालों में अप्रशिक्षित व्यक्ति ही इलाज और ऑपरेशन तक करते हैं जिससे अक्सर प्रसूताओं की मौत की खबर आती रहती है। मामला बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग हॉस्पिटल को सील कर मामले की इतिश्री कर लेता है लेकिन बाद में फिर उस हॉस्पिटल को मौत का खेल खेलने के लिए खोल दिया जाता है।

“ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि रॉबर्ट्सगंज सहित जिले भर में बगैर रजिस्ट्रेशन के खुल रहे हैं हॉस्पिटलों पर नोडल अधिकारी और उनकी टीम की निगाह क्यों नहीं पड़ती? ऐसे में जिलाधिकारी को मामले का संज्ञान लेकर उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में एक टीम गठित कर मौत बांटने वाले ऐसे हॉस्पिटलों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”

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