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जागरूकता से ही एड्स को होगा बचाव: डॉ0 नेम सिंह

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज यानी 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस के अवसर पर जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से ओम प्रकाश पाण्डेय कालेज ऑफ पैरामेडिकल एण्ड साइन्सेस में संगोष्ठी, हस्ताक्षर अभियान, एचआईवी / एड्स जागरूकता शिविर/प्रदर्शनी समेत विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नेम सिंह मौजूद रहे।

इस दौरान मुख्य अतिथि मुख्य मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नेम सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 आर0जी0 यादव, उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 संजय सिंह, कॉलेज के प्रबन्धक ओम प्रकाश पाण्डेय ने सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 नेम सिंह ने बताया कि “एचआईवी एड्स से जानकारी ही बचाव है। इसलिए अधिक से अधिक लोगों तक इस सम्बन्ध में जागरूकता पैदा की जाय तथा टीबी एवं एड्स के बीच के सम्बन्ध की गम्भीरता को बताते हुए यह कहा कि सभी टीबी के रोगियों में एचआईवी की सम्भावना अधिक होती है। एचआईवी की जाँच सभी प्राथमिक/सामुदायिक केन्द्रों पर निःशुल्क की जाती है तथा एचआईवी से ग्रसित रोगी का उपचार भी अन्य रोगियों जैसा ही किया जाता है।”

वहीं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 आर0जी0 यादव ने बताया कि “एचआईवी एक प्रकार के विषाणु (वायरस) का संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के कारण धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। अंततः व्यक्ति एक ऐसी अवस्था में पहुंच जाता है जब हर प्रकार का इंफेक्शन उसे आसानी से होने लगता है, जिस पर दवाओं का भी पूरा असर नहीं होता और रोगी धीरे-धीरे मौत के करीब पहुंच जाता है। चूंकि एचआईवी/एड्स का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है इसलिए जानकारी ही इसका एकमात्र बचाव है।

संगोष्ठी में उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ0 संजय सिंह ने उपस्थिति छात्र-छात्राओं के विभिन्न प्रश्नों का सरल भाषा में उत्तर देते हुए कहा कि बचाव ही इसका इलाज एकमात्र इलाज है। इसलिए यह जानना सबके लिए आवश्यक है कि एचआईवी संक्रमण कैसे होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है। मानव शरीर में एचआईवी का संक्रमण चार तरीको से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध, एचआईवी संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद के चढाए जाने, एचआईवी संक्रमित सुइयों एवं सिरिंज के साझा प्रयोग और एचआईवी संक्रमित माँ से उनके होने वाले बच्चों को हो सकता है। वहीं एचआईवी हाथ मिलाने, एक साथ घर मे रहने, कपड़ों के आदान प्रदान, साथ खाना खाने, मच्छर के काटने, शौचालय अथवा स्वीमिंग पूल के साझा प्रयोग से नहीं फैलता है। एचआईवी संक्रमण से बचाव को लेकर उन्होंने बताया कि असुरक्षित यौन संबंध से बचे। संयम बरते। जीवन साथी के प्रति वफादर रहे और कण्डोम का प्रयोग करें। कण्डोम का प्रयोग एचआईवी संक्रमण से बचाता है। यदि रक्त की आवश्यकता हो तो सदैव सरकारी अथवा लाइसेंसशुदा जाँचा परखा रक्त ही लें। नियमित रक्तदान करें ताकि जरूरतमंद व्यक्ति दलालों के चंगुल में फंसकर संक्रमित रक्त लेने को मजबूर न हो। सुनिश्चित करें कि इस्तेमाल की जानी वाली सीरिंज नई तथा सीलबन्द हो। आपके द्वारा इस्तेमाल की गयी सीरिंज उचित ढंग से निस्तारित/खडित कर दी गयी है। हर गर्भवती माँ की एचआईवी जाँच सुनिश्चित करें। एचआईवी संक्रमित माँ का प्रसव चिकित्सक की देख-रेख में ही करायें।

इस अवसर पर राजकुमार निराला, आनन्द मौर्य, सतीश सोनकर, अभिमन्यु दूबे, विमल सिंह, अश्वनी पाण्डेय, विशाल पाण्डेय एवं सिद्धार्थ पाण्डेय एवं कॉलेज छात्र एवं छात्राओं अन्य लोग उपस्थित रहे।

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