Tuesday , October 4 2022

शर्मनाक: मकरा गांव में 40 लोगों की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग मगर अब तक जनप्रतिनिधियों को नहीं मिली फुर्सत

आनंद कुमार चौबे/एस0 प्रसाद (संवाददाता)

सोनभद्र म्योरपुर ब्लाक के मकरा ग्राम पंचायत में 12 दिनों में 15 लोगों की मौत के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद तो टूट गयी लेकिन अभी तक शायद जनप्रतिनिधियों को यह मामला छोटा ही नजर आ रहा है। चार विधायक, एक लोकसभा सांसद, एक राज्यसभा सांसद वहीं एक राज्यमंत्री वाले जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि इस गाँव की कोई सुध नहीं है। ओबरा विधानसभा अंतर्गत आने वाले इस गांव में अब तक कोई भी जनप्रतिनिधि ग्रामीणों का हाल तक जानने नहीं पहुंचा।

ग्रामीणों की माने तो अब तक सांसद, विधायक सहित अन्य नेता भी गांव में शोक जताने तक नहीं पहुंचे।
यह हाल तब है जब दो महीने बाद विधानसभा का चुनाव होना है लेकिन किसी भी दल के जनप्रतिनिधियों को मकरा जाने का फुर्सत तक नहीं मिला।

पूर्व प्रधान रामभगत यादव की माने तो अब तक 40 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। पूर्व प्रधान ने मौत के लिए ग्रामीणों में जागरूकता की कमी जिम्मेदार बताया है। उन्होंने बताया कि अब तक गांव में न सांसद आये और न विधायक लेकिन वे खुद विधायक से मिलकर समस्या को बताया था। जिसके बाद यहां एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती हुई महीन तो पहले स्वास्थ्य कर्मी ही भेजे जा रहे थे।

बहरहाल मकरा गांव की घटना ने न सिर्फ शासन द्वारा संचालित संचारी माह की पोल खोल दी बल्कि जनप्रतिनिधियों की सोच भी सामने आ गयी ।

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