Friday , September 30 2022

महापर्व छठ पूजा: छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया अर्घ्यं

संजय केसरी / अर्जुन मौर्या (संवाददाता)

डाला। छठ महापर्व पर बुधवार को व्रत धारियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर की आराधना की। व्रत धारियों ने अपने एवं परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए कमर तक पानी में जाकर सूर्य को अ‌र्घ्य दिया

इस दौरान डाला क्षेत्र और ग्राम पंचायत कोटा के क्षेत्रों में सभी घाटों पर हजारों लोग उमड़ पड़े। डाला क्षेत्रों में छठ के दौरान घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मियों की ओर से निगरानी की जा रही थी। घाट पर हर तरफ छठ मैया के गीत गूंज रहे थे। लोग ढोल-नगाड़े की थाप पर नृत्य कर रहे थे।

आपको बतादूँ कि आस्था का महापर्व छठ पूजा एक ऐसा महापर्व हैं जिसमे माताएं पुत्र के लिए व्रत रखती हैं क्योंकि इस महापर्व छठ पूजा की महिमा अपरम्पार हैं। छठ पूजा पर्व में न कोई ब्राम्हण पूजा करवाता हैं और ना ही कोई भेद भाव है चाहे वह किसी जाति का हो, चाहे गरीब हो या अमीर सभी एक जगह बैठ कर पूजा करते हैं।

महापर्व छठ पूजा पर्व में भगवान सूर्यदेव की उपासना का चार दिवसीय महापर्व हैं। छठ पूजा व्रत सोमवार को नहाए खाए के साथ प्रारंभ हुआ है और छठ व्रती पूरे शुद्धता के साथ स्नान आदि कर अरवा चावल का भात, चने की दाल और लौकी की सब्जी खाकर छठ महापर्व का शुभारंभ की। मंगलवार को खरना रखी और बुधवार को व्रती पूरे दिन व पूरी रात उपवास रखकर शाम अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दान दिया।

गुरमुरा में छठ पूजा सेवा समिति के तरफ पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से किया गया जिससे छठ वर्तियों को कोई परेशानी न हो सके। छठ पूजा समिति के अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने कहाकि यह छठव्रत एक ऐसा व्रत हैं कि इसमें कोई भेदभाव नही होता हैं।

वही समिति के उपाध्यक्ष परमहंस पटेल (मनोज पटेल) ने कहा कि यह छठ पूजा व्रत बहुत बड़ा महापर्व हैं और यह हमलोगों को या हमारे समिति को इन छठवर्तियों आर्शीवाद प्राप्त होता हैं। वही छठ पूजा समिति के तरफ से सभी छठ वर्तियों के सुपले में फल, केला सेव सिंघाड़ा सन्तरा इत्यादि फल दिया गया।

सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन भी चुस्त दुरुस्त नजर आए

आपको बतादूँ कि अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दान देने के बाद छठव्रती पूरी रात छठघाट पर आराधना कर गुरुवार की सुबह उगते भगवान भास्कर को अर्घ्य दान कर व्रत का समापन करेंगे।

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