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आम आदमी पर महंगाई की बुरी मार, फीका हुआ दीपावली का त्योहार

घनश्याम पाण्डेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन। पिछले कुछ वर्षों में निरंतर जिस तेजी के साथ देश में महंगाई बढ़ी है, उससे गरीब तबका तो पहले से ही परेशान है, लेकिन अब तो एक मध्यमवर्गीय परिवार को भी अपनी आय और व्यय में सामंजस्य बैठाना बेहद मुश्किल हो रहा है, चिंता की बात यह है कि महंगाई के प्रकोप के लंबे समय से चले आ रहे हालातों में सुधार होने की जगह परिस्थितियां दिन प्रतिदिन विकट होती जा रही हैं। जिसके संबंध में जनपद न्यूज़ लाइव के संवाददाता ने कुछ बुद्धजीवी वर्ग के लोगो से महंगाई को लेकर उनका विचार जानना चाहा,पेश है उनसे हुई बातचीत की एक खास रिपोर्ट:-

1-कोरोना के चलते मंदी के इस दौर में हर क्षेत्र में कामकाज पहले से ही बेहद सुस्त चल रहा है, मंदी की वजह से लोगों को अपने व्यापार, रोजगार व नौकरियों को सुरक्षित रखना एक बहुत बड़ी चुनौती बनती जा रही है। मेहनतकश, नौकरी पेशा यहां तक की व्यापारियों के लिए भी बचत तो एक बहुत दूर की बात होती जा रही है, उनका दैनिक खर्चा भी पहले की भांति सही ढंग से पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसी विकट परिस्थितियों में लोगों को केंद्र व राज्य सरकारों के स्तर से महंगाई से राहत मिलने की बड़ी उम्मीद हैं,आम जनमानस चाहता हैं कि सरकार कम से कम दैनिक उपभोग की बेहद आवश्यक वस्तुओं के दामों में कमी करके जल्द से जल्द महंगाई से आम आदमी को राहत प्रदान करें।

संजय जैन,अध्यक्ष उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल

2-देश में धीरे-धीरे अब यह मानने वालें लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है कि हमारे देश के सत्ताधारी राजनेता, नीतिनिर्माता व सिस्टम महंगाई रोकने के नाम पर फाइलों में केवल खानापूर्ति करके सत्ता के महलों में बैठकर सत्तासुख का आनंद भोगने में मस्त हैं, उनकी नीतियां जनता को महंगाई के प्रकोप से राहत दिलाने में पूर्णतया विफल व प्रभावहीन साबित हो रही हैं।

दिनेश गिरी,कांग्रेस नेता

3-कोरोना काल के बाद देश में आर्थिक मंदी व सभी क्षेत्रों में बढ़ती महंगाई ने आम जनता के सामने ‘वह जीवनयापन कैसे करें’ की एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। महंगाई की मार के चलते इस बार त्योहारी सीजन में भी कोरोना काल की ही तरह बाजारों से रौनक गायब है।

नजमुद्दीन इदरीशी,सपा नेता

4-जीवन जीने के लिए बेहद जरूरी दैनिक उपभोग की वस्तुओं व पेट भरने वाली रसोई के बढ़ते बजट ने आम व खास सभी वर्ग के लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, प्रत्येक व्यक्ति का घरेलू खर्चे का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है, लोग भविष्य में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अब अपनी आय के स्रोत बढ़ाने के लिए चिंतित नज़र आने लगे हैं।

विजय अग्रहरि,पूर्व चेयरमैन चोपन

5-महंगाई के चलते आज यह स्थिति हो गयी है कि बेहद जोशोखरोश के साथ मनाये जाने वाला त्योहारी सीजन एकदम फीका जा रहा है। हर माह लाखों रुपये कमाने वाले परिवार भी सरकार की ओर से महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद में आशा भरी दृष्टि से देख रहे हैं, क्योंकि अब उनके परिवार की सालाना बचत महंगाई के चलते दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ती हुई कमरतोड़ महंगाई ने बहुत सारे परिवारों का बजट बिगाड़कर रख दिया है, जहां आम आदमी बेरोजगारी और इस कमरतोड़ मंहगाई के चलते अपने दो वक्त की रोटी के लिए परेशान है।

कामरेड आर के शर्मा,भाकपा नेता

6-आसमान छूती महंगाई को पर लगाने में रही-सही कसर पेट्रोल-डीजल के बढ़ती कीमतों ने पूरी कर दी है, जिसकी वजह से देश में माल भाड़े, रोजमर्रा के यात्री किराए में भारी बढ़ोत्तरी हो गयी है, एलपीजी सिलेंडर के रेट भी निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं, इनके दामों में जिस तेजी के साथ आयेदिन बढ़ोतरी हो रही है, उससे हर सेक्टर की वस्तुओं का मूल्य बढ़ाने का भारी दबाव बढ़ गया है। सरकार को कमरतोड़ महंगाई की इस गंभीर समस्या के निदान के लिए जल्द से जल्द धरातल पर नज़र आने वाले ठोस प्रयास करने चाहिए।

सेतराम केशरी,कांग्रेस नेता

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