Sunday , October 2 2022

भजन और चिंतन सिर्फ एक परमात्मा का- स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

विवेकानंद मिश्र/संजीव पांडेय (संवाददाता)

० सत्संग में योग साधना का बताया महत्व

शक्तेषगढ़ (मिर्जापुर) । परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़गढ़ में रविवार को योग साधना के अंतर्गत जो स्वयं योगी हो और दूसरों को भी योग प्रदान करने की क्षमता रखता हो वही है, असली योगेश्वर, उक्त बातें परम पूज्य सदगुरुदेव भगवान स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने भक्तों के समक्ष कही ।
स्वामी जी ने बताया कि भजन और चिंतन सिर्फ एक परमात्मा का, लेश मात्र भी त्रुटि न होने पाए, क्योंकि सद्गुरु पूर्ति- पर्यंन्त तक साधक के साथ साथ रहते हैं, यथार्थ गीता के प्रणेता ने भक्तों को बताया कि किसी तत्वदर्शी महापुरुष के सानिध्य में सत्संग महापुरुषों की टूटी -फूटी सेवा के बाद ही आध्यात्म की लौ जागृत होती है । तानसेन महाराज के भजन सुनकर श्रोता गण भाव-विभोर हो उठे । बीच-बीच में सभी भक्त गणों ने ओम श्री सदगुरुदेव भगवान की जय का उद्घोष लगाया, स्वामी जी ने कहा कि पूरी श्रद्धा के साथ काम, क्रोध, लोभ, मोह का त्याग करके सभी लोग यथार्थ गीता रूपी धर्म ग्रंथ का अध्ययन करें।भगवान स्वयं साधक को उस स्थान तक पहुंचा देंगे, जहां उसने कभी कल्पना भी न की थी । सभी लोगों के घरों में भारत का धर्म ग्रंथ यथार्थ गीता अवश्य होना चाहिए । पूरी तरीके से आश्रम भक्तों से भरा रहा । विभिन्न जनपदों से आए हुए लोगों ने बाल भोग, दोपहर का भोजन तथा शाम का सत्संग सुनने के बाद ही अपने-अपने जनपदों को रवाना हो गए । इस दौरान आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था की कमान आश्रम के वरिष्ठ संत नारद महाराज जी ने संभाला ।

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