Tuesday , October 4 2022

रोशनी के दियों को गढ़ने वाले जी रहे बदहाली की जिंदगी

विवेकानंद मिश्रा(संवाददाता)

शाहगंज। एक समय था जब सुबह की चाय कुल्हड़ वाली मिल जाए ,और लोग चाय की चुस्कियों के साथ दिनभर की खबरों को साझा करते और अपने दिन की शुरुआत करते हैं।रामनगर की मशहूर लस्सी आज भी कुल्हण में ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। जी हां शाहगंज बाजार से 2 किलोमीटर दक्षिण मार्ग पर ओड़हथा गांव के आखिरी छोर पर बसे बेचन राम प्रजापति का घर आज भी दीपावली पर लोगों का घर रोशन करने वाले दिए, गुल्लक, गर्मी में देसी कूलर के रूप में विख्यात गगरी, नवरात्र के दिनों में कलश रूप इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे घड़े, आज में इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन 21वीं सदी के इस दौर में लोगों ने अपनी पुरानी चीजों को त्याग कर थर्माकोल से बने हुए पत्तल, गिलास पूरे बाजार में आम तौर पर देखा जा सकता है।

एक समय था लालू यादव जब रेल मंत्री बने ,तभी उन्होंने एक घोषणा भी की, सभी स्टेशनों पर कुल्हड़ का प्रयोग किया जाए। कुम्हार समाज लालू यादव के इस फैसले पर अपने पुश्तैनी धंधे में एक नई आस महसूस की और दुगने उत्साह के साथ अपने पुश्तैनी कारोबार में लग गए ।वैसे तो इस गांव में बेचन राम के 8 पुत्र और 8 पुत्र वधू हैं, और सभी लोगों से कूल 30 बच्चे भी है।उन्होंने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के चलते कुम्हार समाज बदहाली की जिंदगी जी रहा है।पुश्तैनी कारोबार धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है और उसका रूप प्लास्टिक और थर्माकोल से बने हुए लेकर जा रहे हैं।

previous arrow
next arrow

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com