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जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने को विवश हैं ग्रामीण व नौनिहाल

आनंद कुमार चौबे/अंशु खत्री (संवाददाता)

सोनभद्र । चाहे धार्मिक कार्यक्रम हो, लोगों को बाजार करना हो या फिर बच्चों को स्कूल जाना हो, खेती किसानी के लिए जाना हो। किसी भी काम के लिए निकलना हो महुअरा, कुरा समेत दो दर्जन से अधिक गावों के लोगों को रोज-रोज जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। आजादी के 70 साल बाद भी फुटओवर ब्रिज नहीं बन पाया। ऐसा नहीं है कि इस समस्या से स्थानीय जनप्रतिनिधि वाकिफ नहीं हैं, लेकिन उनका रवैया भी अब तक उदासीन ही रह है।

डबल इंजन की सरकार बनाने के बाद यहां के लोगों में एक आशा जगी थी कि इस बार केंद्र और राज्य में भी भाजपा की सरकार एवं स्थानीय विधायक व सांसद भी भाजपा और सहयोगी दलों के होने से समस्या का निदान होगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कुछ दिनों पूर्व चुर्क आये डीआरएम ने भी यहां फुट ओवर ब्रिज बनाने की बात कही थी परंतु वह भी ढाक के तीन पात साबित हुआ।

सोनभद्र के चुर्क रेलवे स्टेशन के समीप प्रतिदिन सैकड़ों स्कूली बच्चे रेलवे लाइन को पार कर जान जोखिम में डालकर अपना भविष्य संवारने के लिए विद्यालय पहुंचते हैं। इतना ही नहीं स्कूल जाते समय ज्यादातर गुड्स ट्रेन (मालगाड़ी) खड़ी होने के कारण स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर ट्रेन के नीचे से गुजरने को मजबूर हैं। कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है लेकिन यह नजारा कभी यहां के न तो अधिकारियों को दिखा और न ही जनप्रतिनिधियों को।

ग्रामीणों ने बताया कि “अपने बच्चों को स्कूल भेजने काफी भय बना रहता है, क्योंकि हर दिन उसे रेल ट्रैक पार कर आना जाना पड़ता है। कब ट्रेन आ जाए इसका कोई पता नहीं। बावजूद यहां फुट ओवरब्रिज बनाने के लिये किसी जनप्रतिनिधि ने पहल नहीं किया।”

चुर्क रेलवे लाइन पार लगभग दो दर्जन से अधिक गांव बसे हैं जिनका आने जाने का आसान मार्ग यही है । चाहे स्कूली बच्चे हो या फिर ग्रामीण, सभी को जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करके आना-जाना पड़ता है।

ग्रामीण बागेश्वरी का कहना है कि “खेती किसानी के काम से अक्सर उस पार जाना पड़ता है। उनलोगों को ट्रेन या बोगियों के नीचे से ही जाना पड़ता है, यह रास्ते से जाना उनकी मजबूरी है क्योंकि दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है। उनका कहना है कि अब तो वे आदती हो चुके हैं।”

महुअरा निवासी ग्रामीण रामेश्वर ने बताया कि “कई बार रेलवे ओवर ब्रिज की मांग उठी थी मगर हर बार ठंडे बस्ते में चला जाता है। कोई सुनने वाला नहीं लेकिन वे इस बार चुनाव में इसे मुद्दा बनाएंगे औऱ मांग करेंगे।”

गांव के प्रधान प्रतिनिधि अरुण सिंह भी इस समस्या को लेकर बेहद चिंतित हैं, उनका कहना है कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं लेकिन वो लोग रेलवे का मामला बताकर मामले से मुँह मोड़ लेते है। प्रधान प्रतिनिधि ने बताया कि बीमारी के समय एम्बुलेंस भी बुलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो खाट ओर मरीजों को रेलवे ट्रैक पार कर लाना पड़ता है। वैसे सड़क मार्ग से 10 किमी0 घूमकर जाना पड़ता है।

बहरहाल सोनभद्र के जनप्रतिनिधि गंभीर समस्याओं पर कितने गंभीर हैं यह तो साफ नजर आ रहा है लेकिन जिस डबल इंजन की सरकार पर वे अपना सीना चौड़ा करते हैं , आखिर उन्हें यह समस्या क्यों नजर आ रही।

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