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श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर का 54वां वर्ष और संगीत समारोह का किया आयोजन

संजय केसरी / अर्जुन मौर्या (संवाददाता)

डाला। 19 अक्टूबर की शाम संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार अनुभव बनकर स्मृतियों में दर्ज हो गई। डाला में वर्ष 1968 में स्थापित हुआ श्री अचलेश्वर महादेव मन्दिर पिछले 54 वर्षों से मन्दिर परंपरा का निर्वाह करता आ रहा है। उसी परंपरा की कड़ी में का शाम श्री अचलेश्वर महादेव मन्दिर फाउंडेशन ने संगीत समारोह का आयोजन किया।

कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ जिसमें संस्था के अध्यक्ष महंत मुरली तिवारी, समाजसेवी विद्या शंकर पांडे, राजेश द्विवेदी, चौकी इंचार्ज मनोज कुमार ठाकुर, नरसिंघ तिवारी एवं विनोद चौबे मौजूद रहें। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं बाँसुरी वादक राकेश कुमार ने कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति राग बागेश्वरी से की। उसके बाद एक पहाड़ी धुन बजाई जिसपर श्रोता मंत्रमुग्ध हुए। मीरा के एक भजन और अपनी एक स्वरचित रचना से उन्होंने अपने कार्यक्रम को विराम दिया।

कार्यक्रम का दूसरा चरण में कर्नाटक की तेजशविनी दिगंबर वर्नेकर ने खयाल गायन की प्रस्तुति दी। अपने नाम के अनुरूप उन्होंने राग केदार में पहली प्रस्तुति देकर ही श्रोताओं को चकित कर दिया। उसके बाद राग सोहनी में बंदिश रंग ना डारो श्याम जी और आखिर में भजन गाकर अपने गायन का समापन किया। तेजशविनी आइटीसी कोलकाता में संगीत की शोधार्थी रही हैं।

कल इनके गायन को सुनते हुए श्रोताओं ने इसी मन्दिर समारोह में आए कुमार गंधर्व के पुत्र मुकुल शिवपुत्र और उनके पोते भुवनेश कोमकली के गायन को याद किया। जिन्होंने राग केदार और सोहनी में इन बंदिशों को सुनाया था। कार्यक्रम का समापन बनारस के चैतन्य मंगलम के कथक नृत्य से हुआ। उन्होंने शिव के अर्धनारीश्वर स्तुति से अपने नृत्य का आरंभ किया।

इसके बाद कथक का परंपरागत तराना एवं शिव तांडव प्रस्तुत कर श्रोताओं को हर्षित कर दिया। अंत में मीरा भजन पर अपनी प्रस्तुति के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम रूप का वर्णन किया। कलाकारों के साथ तबले पर संगत पंकज राय ने एवं हारमोनियम पर पंकज शर्मा थें। कार्यक्रम का समापन कलाकारों को भेंट स्वरूप पुस्तक देकर किया गया। कार्यक्रम का संचालन किरण तिवारी एवं संस्था के सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने किया।

संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि पूरे भारत में यह मन्दिर भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने एवं इसे आगे बढ़ाने के लिए जाना जाता है। हम मन्दिर परंपरा का निर्वाह करते हुए कला, संगीत और शिक्षा पर मुख्य रूप से काम कर रहे हैं। कार्यक्रम में सूर्य प्रकाश तिवारी, इंदु यादव, संतोष कुमार, मुकेश जैन, अविनाश शुक्ला, उत्तम मिश्र, कुमार मंगलम तिवारी, आशीष अग्रहरी, शुभम त्रिपाठी भी मौजूद रहें।

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