Tuesday , October 4 2022

विश्व दृष्टि दिवस : कंप्यूटर-मोबाइल की रोशनी से बच्चों की आँखों को खतरा

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । कोरोना काल के बाद बंद मकान में मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल ने बच्चों की आंखों की रोशनी पर असर डाल दिया है। मोबाइल पर गेम खेलकर और पढ़कर बच्चे मायोपिया का शिकार हो रहे हैं। उनकी आंखों की रोशनी माइनस में जा रही है। कम उम्र में ही बच्चों की आंखों पर चश्मा चढ़ रहा है।
कोरोना से पहले भी बच्चे मोबाइल के बहुत आदी हो गए थे, लेकिन बाद की स्थिति ने मोबाइल और बच्चों का एक दूसरे का पूरक बना दिया है। कोरोना के शुरुआत में दो तीन महीने बच्चों ने मोबाइल पर ही समय बिताया, अभिभावकों ने भी उन्हें नहीं टोका। उन्हें लगा कि घर में हैं तो बच्चे सुरक्षित हैं। इसके बाद ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई। नवंबर, दिसंबर में स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ तो इस साल फरवरी में फिर कोरोना की दूसरी लहर आ गई। इस स्थिति में बच्चे घरों के अंदर तो रहे ही, हर समय केवल मोबाइल में ही गेम खेलने और पढ़ाई में लगे रहे। इसका असर बच्चों की आंखों पर पड़ा है। समय-समय पर बच्चों की आंखों की जांच न कराने की वजह से स्थिति और बिगड़ रही है।

डाक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चे जब दिखाई कम पड़ने की समस्या बताएं तो तत्काल उन्हें नेत्र रोग विशेषज्ञ से दिखाने की जरूरत है। इसमें लापरवाही न बरतें। इसके प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 14 अक्टूबर को ‘विश्व दृष्टि दिवस’ मनाया जाता है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ0 बी0के0 श्रीवास्तव ने बताया कि “घर पर मोबाइल या लैपटाप पर आनलाइन क्लास लेने से बच्चों की आंखों पर ज्यादा असर पड़ा है। रोशनी वाली किसी भी स्क्रीन पर देर तक काम करना या उसे देखने से यह समस्या होती है। इसमें आंखों का सूखापन ज्यादा होने पर रोशनी छिनने का खतरा होता है। बच्चों को विटामिन ए की खुराक जरूर पिलाएँ। आंखों में दिक्कत समझ में आने पर तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।”

आंखों की सुरक्षा के लिए ये करें

● दिन में एक घंटा बच्चों को खुले में खेलने दें

● मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम कराएं

● टीवी व मोबाइल को उचित दूरी से देखें

● पढ़ाई लैपटॉप व टैबलेट से कराएं

● हरे पत्ते की सब्जी, पीले फल और गाजर खिलाएं

previous arrow
next arrow

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com