Sunday , September 25 2022

श्रीरामलीला-कैकेई के कटु वचन सुनते ही मूर्क्षित हुए राजा दशरथ

धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)

-महुली में चल रहे श्रीरामलीला का छठवां दिन

विंढमगंज।थाना क्षेत्र के स्थानीय राजा बरियार शाह खेल मैदान महुली पर चल रहे श्रीरामलीला के छठवें दिन राम वनवास लीला का बड़े ही मार्मिक ढंग से मंचन किया गया।रामलीला परिषद के कलाकारों ने बिभिन्न चरित्रों के रूप में अपने भूमिका का लोहा मनवा दिया।रामलीला के क्रम में अयोध्या में उत्सव का माहौल देख दासी मन्थरा को पता चलता है कि श्रीराम का राज्याभिषेक होने वाला है तो वह तुरन्त महारानी कैकेई के पास पहुँच कर महाराज दशरथ द्वारा दिए दो बचन का याद दिलाती है कि यह उचित समय है।

महाराज के दिए वचन को मांगने का यही उचित अवसर है।श्रीराम का आज राज्याभिषेक होने वाला है।आपका पुत्र भरत राजा नही बन सकता।इसलिए भड़काते हुए कहती है कि दो वचनों में पहली भरत को राजगद्दी तथा दूसरी राम को चौदह वर्ष की बनवास का वर मांगना।यह सुनकर रानी कैकेई को क्रोध आता है परन्तु लालच भरी बातों को सुनकर महारानी कैकेई तैयार हो जाती हैं तथा अपने वचनों को मांगने हेतु रूठकर कोप भवन में चली जाती है।महाराज को इसकी खबर लगते ही महारानी कैकेई को मनाने कोपभवन में जाते हैं।वहाँ महारानी द्वारा कटु वचन सुन महाराजा मूर्छित हो जाते है।कहते हैं कि

“रघुकुल रीति सदा चलि आई,प्राण जाय पर वचन न जाई”
उधर पिता की आज्ञा पर प्रभु श्रीराम माता सीता के साथ वन को गमन करते हैं।इसके अलावा वन गमन के समय अयोध्या वासियों का वीरह,केवट सम्वाद जैसे अनेक दृश्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।इस मौके पर समिति के अध्यक्ष अरविन्द जायसवाल,शेषमणि चौबे,वीरेंद्र कन्नौजिया,पंकज गोश्वामी,विकास कन्नौजिया,चन्द्र भूषण,राजकपूर कन्नौजिया ,प्रेम चन्द सहित समिति के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
[psac_post_slider show_date="false" show_author="false" show_comments="false" show_category="false" sliderheight="400" limit="5" category="124"]

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com