Tuesday , October 4 2022

सरकार को आइना दिखाता सच : परिवार का पेट पालने के लिए स्कूली छात्र सड़कों पर मांग रहा भीख

शान्तनु कुमार/आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । अपने अंधे पिता को साथ लिए लोगों के सामने हाथ फैलाए इस बालक को तो आप देख पा रहे होंगे…अब आप इस बालक के शर्ट पर गौर करें…स्कूली ड्रेस पहने इस बालक को लोगों के सामने किस मजबूरी में हाथ फैलाना पड़ रहा है, यही जिज्ञासा हमें इस बच्चे के पास ले गयी । पूछने पर इस बालक ने जो बताया उसे हम आपको आगे सुनाएंगे….

पहले आप जान लें कि यह मामला उस जनपद के है जिस जिले में सत्ताधारी दल के तीन विधायक व एक राज्य मंत्री है । यह नजारा उस जनपद का है, जिस जिले के प्रभारी मंत्री खुद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री हैं।

जी हां आपने सही समझा, यह मामला जनपद सोनभद्र का है।

यूं तो सरकार व उनके मंत्री शिक्षा को लेकर तमाम दावे करते हैं। मगर यह तस्वीर इस बात का गवाह है कि जब पेट में अन्न नहीं तो शिक्षा भी बेमतलब सी लगने लगती है।

लगभग 150 किमी0 दूर बभनी से चलकर रावर्ट्सगंज भीख मांगने पहुंचे मासूम ने बताया कि वह कक्षा 5 में पढ़ता है लेकिन घर का खर्च न चलने के कारण उसे यह सब करना पड़ता है।

यह तस्वीर शासन-प्रशासन के उस दावे को आइना दिखाती है जिसमें प्रशासन यह दावा करती है कि वह ऐसे बच्चों को खोजकर स्कूल भेजने का काम कर रही है जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं।

गरीबी व तंगहाली से जूझ रहे परिवार के मुखिया व बच्चे के अंधे पिता ने बताया कि 6 लोगों का बड़ा परिवार है जिसके चलते गुजरा करना मुश्किल हो जाता है।

बड़ा सवाल यह है कि देश में शिक्षा का अधिकार जैसे कानून तो बने हैं मगर देश में ऐसा कोई कानून नहीं कि लोगों का पेट भर सके, शायद यही कारण है कि मजबूरी में लोगों के सामने सबसे पहला विकल्प पेट भरने की होती है, जो लोगों को खुद करना पड़ता है ।

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