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अदालत का फैसला: पॉक्सो एक्ट के दोषी को 7 वर्ष की कैद

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

● 30 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद

सजा में समाहित की जाएगी जेल में बितायी अवधि

पीड़िता को मिलेगी अर्थदंड की समूची धनराशि

सोनभद्र । साढ़े छह वर्ष पूर्व नाबालिग किशोरी के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने आज सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी परवेज को 7 वर्ष की कैद एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की समूची धनराशि पीड़िता को मिलेगी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक बभनी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 9 अप्रैल 2015 को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि एक अप्रैल 2015 की शाम 7 बजे जब उसकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी घर में अकेली थी तभी अचानक बड़होर गांव निवासी परवेज उसके घर में घुस गया और उसकी नाबालिग बेटी के साथ जबरन दुष्कर्म किया। चिखने-,चिल्लाने की आवाज सुनकर बहु और दूसरी बेटी आ गई तो परवेज घर से निकल कर भाग गया। लोक लज्जा की वजह से पहले प्रयास किया गया कि निकाह हो जाए, लेकिन वह तैयार नहीं हुआ तब मजबूर होकर तहरीर देना पड़ रहा है। इस तहरीर पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की। विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रवली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी परवेज को 7 वर्ष की कैद एवं 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं पीड़िता को अर्थदंड की समूची धनराशि मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश अग्रहरि व सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने बहस की।

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