Monday , October 3 2022

…आखिरकार इस बेरहम दुनिया को नवजात ने छोड़ दिया

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । आखिरकार एक मां की बेदर्दी और स्वास्थ्य विभाग के खेल ने एक नवजात की जिंदगी छीन ली। वह बच्चा जो धरती पर जन्म तो लिया लेकिन शायद सब यह बेदर्द दुनिया रास नहीं आया और वह महज 72 घण्टे में ही इस दुनिया से रुखसत कर गया।

आपको बतादें कि 5 अक्टूबर तड़के म्योरपुर के जंगल में टहलने निकले कुछ लोगों को नवजात के किलकारी सुनने को मिली, जब भाग कर नजदीक पहुंचे तो देखा कि एक झोले में लिपटा एक नवजात लड़का रो रहा है। राहगीरों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस ने फौरी तौर पर पहुंचकर नवजात को स्थानीय म्योरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने नवजात की स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

जिला अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे का तत्काल इलाज शुरू कर दिया। बाल रोग विशेषज्ञ और एनआईसीयू प्रभारी डॉ0 प्रशांत शुक्ला खुद नवजात के इलाज में घण्टों डटे रहे, उस दिन तो किसी तरह समय बीत गया लेकिन अगले दिन नवजात ने इस बेदर्द दुनिया को छोड़ दिया।

यह घटना कोई पहली घटना नहीं जिसकी हम चर्चा कर रहे, लेकिन चर्चा इस बात की होनी चाहिए आखिर कब तक स्वास्थ्य विभाग पैसे कमाने के चक्कर में अपनी आंखें मूँदें रखेगा?

जिस तरह जिले में इन दिनों तेजी से फर्जी नर्सिंग फलफूल रहा है, जिसकी वजह से भ्रूण हत्याओं और अवैध एबॉर्शन में बढ़ोत्तरी हुई है। उसी का नतीजा है कि अक्सर अजन्में बच्चों के भ्रूण और नवजात जंगलों-झाड़ियों या सड़कों के किनारे पड़े मिलते हैं। मानवीय संवेदनाओं को तार-तार करने वाली इन घटनाओं में जिले का स्वास्थ्य महकमा हमेशा मूकदर्शक बना रहता है।

ऐसे में सोनभद्र के जनप्रतिनिधियों की स्थिति भी हमेशा से मौन की रही है। जनप्रतिनिधि ऐसे मौके पर चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं। शायद यही कारण है कि यही चुप्पी इन धंधेबांजों को खाद-पानी का काम करती है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह सब कब तक चलता रहेगा। आखिर स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा और मानवता की हदें पार करने वाले ऐसे हॉस्पिटलों पर कब कार्यवाही करेगा? कब इस तरह के बच्चे इस दुनिया में पूरी तरह से आ सकेंगे?

वहीं डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने बताया कि “नवजात बच्चा मात्र एक किलो का और प्रिमेच्योर था साथ ही हाइपोथर्मिया का भी शिकार हो गया था, जिसे बचाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन मंगलवार को इसकी मौत हो गयी।”

आश्चर्य की बात यही है कि आदिवासी बाहुल्य जनपद में निजी अस्पतालों में अवैध रूप से गर्भपात का गोरखधंधा पनप रहा है। मुंहमांगी कीमत लेकर गर्भ समापन करने के इस खेल में महिलाओं की जान दांव पर लगाई जा रही है। जिले का स्वास्थ्य महकमा यहां के हरहाल से वाकिफ है, इस तरह के मामले पकडऩा तो दूर जांच तक नहीं हो रही। ऐसे में निजी अस्पताल बेखौफ होकर खुलेआम अनैतिक और गैरकानूनी कार्य को अंजाम दे रहे हैं।

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