Saturday , October 1 2022

परिषदीय स्कूलों का हाल बेहाल, जूनियर कक्षाओं में पढ़ा रहे सीनियर बच्चे

संजय केसरी/अर्जुन मौर्या (संवाददाता)

● बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के प्रभार वाले जनपद के शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल

● बच्चों का आरोप, न ढंग का खाना मिलता है और न होती है पढ़ाई

● गुरमुरा के कंपोजिट विद्यालय पतगढ़ी का मामला

डाला सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए सरकार लगातार काम व प्रयोग कर रही है। सरकार ने सभी स्कूलों का कायाकल्प करने के साथ नारा दिया खूब पढ़ो-खूब बढ़ो। मगर सोनभद्र में बच्चे न पढ़ पा रहे और न बढ़ पा रहे। वजह लाखों की लागत से स्कूल तो चमका दिया गया मगर स्कूल में तैनात शिक्षक की मानसिकता सरकार नहीं बदल सकी।
आज हम जिस स्कूल की बात करने जा रहे हैं वह है चोपन ब्लाक के गुरमुरा क्षेत्र में स्थापित कंपोजिट विद्यालय पतगढ़ी। पिछड़े आदिवासी क्षेत्र में स्थापित इस स्कूल में बच्चे आते तो हैं पढ़ने, मगर बच्चों का कहना है कि टीचर खुद पढ़ाने के बजाय सीनियर बच्चों को छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए भेज देते हैं।

बच्चों का कहना है कि यह रोज किया जाता है और न जाने पर डांटते हैं। कई बच्चों का आरोप है कि खाना भी ढंग का नहीं दिया जाता।

बच्चों का कहना है कि ऐसे तो तमाम समस्या है। कई बच्चों ने बताया कि टीचर के आने का कोई समय नहीं है, जब मन तब आते हैं और चले जाते हैं।

बड़ा सवाल तो यह है कि यह हाल उस जनपद के है जहां के प्रभारी मंत्री खुद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री हैं औऱ अभी हाल ही में आदिवासी समाज से एक विधायक को मंत्री बनाया गया है।

बहरहाल शिक्षा विभाग में अध्यापकों की मनमानी का यह कोई नया मामला नहीं है लेकिन अधिकारी जांच के नाम पर अक्सर मामले को दबा देते हैं जिससे विभाग में इस तरह की पुनरावृत्ति अक्सर देखने को मिलती है।

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