Monday , October 3 2022

लोकलाज के भय से नवजात को जंगल में फेंका, नाजुक स्थिति में एनआईसीयू में भर्ती

शान्तनु कुमार/आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । एक माँ ने अपने बच्चे को नौ माह तक पेट में रखा और फिर बेदर्दी दिखाते हुए उसी बच्चे को जन्म देते ही जंगल में फेंक दिया। लेकिन कहते हैं जाको राखे साईंया मार सके ना कोय, वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने उसकी किलकारी सुनी तो मानवता जाग उठी। वे पास जाकर देखा तो नवजात एक झोले में लिपटा हुआ था। लोगों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। मानवता को शर्मसार कर देने वाली यह घटना थाना क्षेत्र म्योरपुर के आश्रम के पास दुद्धी मार्ग पर सड़क के किनारे का है।

ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची म्योरपुर पुलिस ने नवजात को कब्जे में लेकर सीएचसी म्योरपुर में भर्ती कराया, जहां उपस्थित चिकित्सकों ने प्रारंभिक जांच के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहाँ डॉयल 108 नं0 एम्बुलेंस की सहायता से पुलिस ने नवजात को जिला अस्पताल पहुँचाया। जिला अस्पताल पहुंचने पर महिला कल्याण समिति ने बच्चे को अपने कब्जे में लेते हुए जिला अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती कराया। जहाँ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने तत्काल बच्चे को परीक्षण कर इलाज शुरू कर दिया।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ0 प्रशांत शुक्ला ने बताया कि “एक लावारिश नवजात लड़का नाजुक स्थिति में बाल संरक्षण विभाग द्वारा जिला अस्पताल लाया गया है, बच्चे की स्थिति नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर ने बताया कि प्री डिलेवरी है। देखने से प्रतीत होता है कि 6-7 महीने का बच्चा है, जिसका वजन मात्र 1 किलो ही है, फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
डॉक्टर ने भी माना कि इस तरह की वारदात न सिर्फ मानवता को शर्मसार करने वाली बल्कि दिल को झकझोर देने वाली है।”

म्योरपुर क्षेत्र में चल रहा अवैध डिलेवरी

यूं तो जिले में अवैध नर्सिंग होम की बाढ़ सी आ गयी है, इसके अलावा झोलाछाप डॉक्टर भी तेजी से बढ़ रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौन है। बस इसी का फायदा ये सभी झोलाछाप व नर्सिंग होम वाले लेते हैं। म्योरपुर की घटना कोई पहली नहीं है। इस तरह की घटना पहले भी आ चुकी है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।

समाज को आगे आने की जरूरत

इस तरह की घटना समाज के लिए कलंक है। यदि इसे रोकना ही तो समाज को जागरूक होना पड़ेगा और समाजसेवियों को आगे आकर ऐसे अवैध डिलेवरी कराने वाले ठेकेदारों पर कड़ी कार्यवाही करना चाहिए।

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